खाद की किल्लत और ऑनलाइन टोकन व्यवस्था के खिलाफ आदिवासी किसानों का गुस्सा, मुख्यमंत्री के नाम सौंपेंगे ज्ञापन

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जितेंद्र वर्मा, जोबट

आलीराजपुर जिले में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही रासायनिक उर्वरकों (यूरिया, डीएपी) की भारी किल्लत और ऑनलाइन टोकन प्रणाली की विसंगतियों को लेकर स्थानीय किसानों का आक्रोश सातवें आसमान पर पहुंच गया है। जिले के पीड़ित किसानों, सजग नागरिकों और विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन तैयार किया है, जिसे कल जिला दंडाधिकारी/अनुविभागीय दंडाधिकारी के माध्यम से सौंपा जाएगा।

तकनीकी विसंगतियों से आदिवासी किसान परेशान

किसानो का प्रतिनिधित्व कर रहे जोबट क्षेत्र के कद्दावर आदिवासी नेता रमेश डावर ने बताया कि आलीराजपुर एक आदिवासी बहुल जिला है, जहाँ की 85% आबादी पूरी तरह खेती पर निर्भर है। ऑनलाइन टोकन प्रणाली यहाँ के सीधे-साधे और अशिक्षित किसानों के लिए अभिशाप बन चुकी है। ग्रामीण अंचलों में नेटवर्क की समस्या और स्मार्टफोन की समझ न होने के कारण गरीब आदिवासी किसान टोकन व्यवस्था से बाहर हो रहे हैं, जबकि तकनीकी रूप से सक्षम लोग रात-रात भर जागकर टोकन बुक कर लेते हैं। जिससे अशिक्षित किसानों को अपना खाद बुक करने में समस्या उत्पन्न हो रही है, प्रतिदिन सोसायटी ओर दुकानों का चक्कर लगाकर परेशान हो रहे है, यह व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का भी खुला उल्लंघन है।

वैध टोकन के बाद भी नहीं मिल रही खाद, हो रही कालाबाजारी

किसानों द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि जिन किसानों को कड़ी मशक्कत के बाद ऑनलाइन टोकन मिल भी जाता है, उन्हें भी सोसायटियों और निजी दुकानों से शाम को यह कहकर भगा दिया जाता है कि खाद खत्म हो गई है। जिले में खाद की वास्तविक कमी से ज्यादा प्रशासनिक उदासीनता के कारण कृत्रिम किल्लत पैदा की गई है। बिचौलियों और डीलर्स की साठगांठ से खाद का अवैध भंडारण कर पिछले दरवाजे से ऊंचे दामों (ब्लैक) में बिक्री की जा रही है। इसके अलावा, किसानों पर जबरन नैनो यूरिया, सल्फर और महंगी कीटनाशक दवाइयां खरीदने का वित्तीय बोझ (अवैध टैगिंग) डाला जा रहा है, जो उपभोक्ता अधिकारों का हनन है।

किसानों की प्रमुख मांगें

आलीराजपुर जिले के लिए यूरिया और डीएपी की नई रैक तुरंत स्वीकृत कर आगामी 3 दिनों के भीतर सभी ब्लॉक केंद्रों पर पहुंचाई जाए। केवल ऑनलाइन प्रणाली पर निर्भरता खत्म कर प्रत्येक केंद्र पर 50% कोटा ऑफलाइन रखा जाए, ताकि अशिक्षित किसान भू-अधिकार पुस्तिका और आधार कार्ड दिखाकर सीधे खाद पा सकें। वैध टोकन धारक को उसी दिन खाद मिलना अनिवार्य हो। स्टॉक खत्म होने पर केंद्र प्रभारी लिखित कारण दे और किसान के आने-जाने के खर्च की क्षतिपूर्ति करे। एसडीएम और कृषि विभाग का संयुक्त उड़नदस्ता बनाकर निजी दुकानों की औचक जांच हो और कालाबाजारी करने वालों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत FIR दर्ज हो। खाद के साथ अन्य अवांछित उत्पाद जबरन बेचने वाले विक्रेताओं के लाइसेंस तुरंत निरस्त किए जाएं।

किसानो ने नाराजगी जताई है कि भारत का संविधान (अनुच्छेद 21) हर नागरिक को आजीविका का अधिकार देता है। यदि प्रशासन ने तय समय के भीतर इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर जमीनी स्तर पर सुधार नहीं किया, तो आलीराजपुर जिले का समस्त किसान समाज अपनी फसलों और आजीविका की रक्षा के लिए सभी ब्लॉक मुख्यालयों पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन, आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए विवश होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और मध्य प्रदेश शासन की होगी।

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