मयंक विश्वकर्मा@आम्बुआ आम्बुआ तथा समीप ग्राम बोरझाड़ सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में होलिका दहन से एक माह पूर्व पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन स्थल पर क्षेत्रीय पुजारा द्वारा एक लकड़ी की बल्ली जिसे स्थानीय भाषा में डांडा कहते हैं गाड़ दिया जाता है। डांडा गाड़ने के बाद क्षेत्र में होलिका दहन का शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन, ग्रह प्रवेश आदि कार्य वर्जित हो जाते हैं। इस बार 16-2-2020 को डांडा गाड़ा गया है तथा 1 माह के बाद यहीं पर होलिका दहन किया जाना है। Post navigation स्टॉप डेम में कटाव, कड़ी शटर को मरम्मत की दरकार संत शिरोमणि रविदास जी की जयंती धूमधाम से मनाई गई