मयंक विश्वकर्मा, आम्बुआ

क्षेत्र में 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ घट स्थापना एवं मूर्ति स्थापित करने के साथ हो गया मगर रात्रि में विगत लगभग एक माह से चली आ रही बिजली की लुका छुपी का असर देखने को मिला, और गरबा रास के आयोजन नहीं हो सके पांडालों में सन्नाटा पसरा रहा।
मिली जानकारी अनुसार आम्बुआ तथा समीप ग्राम बोरझाड एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों शारदीय नवरात्र के आयोजन हो रहे हैं जिसके लिए विशाल पांडालों को बिजली की झिल मिलाती रोशनी से जगमगाया गया है,11 अक्टूबर को इन्हीं पांडालों एवं माता मंदिरों में घट स्थापना के साथ अस्थाई मूर्तियां स्थापित की गई, हजारों रुपए खर्च करने के बाद जब रात्रि में गरबा डांडिया रास खेलने के लिए महिला पुरुष, युवक युवतियों ने पांडालों में कदम रखा तभी बिजली गुल हो गई जिससे अफरा तफरी का माहौल बन गया, इसके बाद बिजली आई लेकिन तभी पंचायत भवन से संचालित स्ट्रीट लाइट की केवल में फाल्ट हुआ और क़स्बे में सड़क किनारे के बिजली खंभों से बिजली गुल हो गई जिससे चारों तरफ अंधेरा छा गया, इसके कारण गरबा खेलने वाले मायूस हो कर लौटने को मजबूर हुए,इस तरह नवरात्रि की प्रथम रात्रि बिजली अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई।
स्मरण रहे कि क्षेत्र में मेंटनेंस के नाम पर लगभग एक माह से घोषित अघोषित बिजली कटौती की जा रही है, इधर क़स्बे में लोहे के नये खंभे लगाए जा रहे हैं तथा उन पर केवल डाली जा रही है,इस कार्य के लिए भी घंटों बिजली गुल रखी जा रही है, मोबाइल पर सूचना डाल कर विभाग अपनी जबाब दारी से मुक्त हो जाता है,फिर भले ही उपभोक्ता परेशान हो ता रहे, स्थिति यह है कि बिजली कब जाएगी और कब आएगी यह कोई बताने वाला नहीं है,जन प्रतिनिधि भी चुप बैठे हैं जैसे अब जनता से कोई काम ही नहीं पड़ेगा?

क्या कहते क़स्बे के नागरिक एवं गरबा पांडाल वाले

1- एक सूचना डाल दी कि इतने बजे से इतने बजे तक लाइट बंद रहेगी, उसके बाद भगवान ही मालिक है कि समय पर बिजली आ ही जाएगी।
विशाल माहेश्वरी समाज सेवक

2- बार बार और अज्ञात समय तक बिजली गुल रहने से हम ठंडे का व्यापार करने वाले परेशान हैं आइसक्रीम, कुल्फी,कोंण, लस्सी आदि यदि एक बार पिघल जाए तो दुबारा उसी स्थिति में पुनः जमती नहीं है और उसे फैंकना ही पड़ता है।
अलीअशगर बोहरा
ठंडाई का व्यावसाई

3- अघोषित बिजली कटौती के कारण आटा चक्की बंद रखना पड़ती है जिससे हमारा तथा ग्राहकों नुक्सान होता है उन्हें बाजार से आटा खरीदना पड़ता है।
हर्ष खंडेलवाल
आटा चक्की वाले।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *