लोहित झामर, मेघनगर एक साथ एक जैसी वेशभूषा में असंख्य महिलाएँ , एक साथ छलकते आस्थाओं के असंख्य पवित्र कलश, श्रीराम सीता लक्ष्मण हनुमानजी की मनमोहक झाँकी माँ दुर्गा की झाँकी और बग्गी पर संतों की उपस्थिति ग्रामीण महिलाओं की लंबी की कतारें छोटी-छोटी बच्चों में अपार उत्साह… ये वो सारें दृश्य थे जो प्रदेश के सबसे चर्चित आयोजन श्री वनेश्वर मारुति नंदन हनुमान जयंती महोत्सव के प्रारंभ में इस वर्ष दिखाई दिए। आयोजन की इस प्रारंभिक कड़ी में नगर केँ हर घर और हजारों ग्रामीणों के साथ श्री वनेश्वर मारुति नंदन हनुमान जयंती महोत्सव समिति के सदस्य दिलीपदास महाराज, श्रीरामदास जी त्यागी टाट वाले बाबा चिंतामणि बाबा, समाजसेवी सुरेशचन्द्र पूरणमल जैन , राजेश रिंकू जैन , जैकी जैन महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए सीमा जैन नीता जैन का जगह-जगह सामाजिक संगठनों और पत्रकार साथियों ने अभिनंदन और स्वागत किया. कलश यात्रा के लिए कलश यात्रा के पहले नगर भर में पानी के टैंकरों से सड़क पर पानी का छिड़काव किया गया था ताकि नंगे पांव चलने वाली महिलाओं को गर्मी ना लगे….यात्रा में ग्रामीण महिलाओं के साथ श्रीगणेश महिला मंडल की महिलाएं भी उपस्थित थी l 1 किलोमीटर से ज्यादा लंबी कलश यात्रा का जगह जगह स्वागत हुआ….कलश यात्रा में प्रख्यात कथा वाचक देवी चित्रलेखा भी उपस्थित हुई l उन्होंने संतों से शुभाशीष लेकर आम लोगो का स्वागत सत्कार स्वीकार किया l साथ ही फुटतालाब की पावन धरा पर बने मंच पर बनी व्यासपीठ पर श्रीमद भागवत की स्थापना की….श्री हनुमान जयंती महोत्सव के प्रारंभ में निकाली गई इस भव्य कलश यात्रा के पूर्व समाजसेवी जैन और परिवार ने संतों की उपस्थिति में भगवान श्री राम की पूजा अर्चना कर नगर जिले व प्रदेश वासियों को श्री राम नवमी की शुभकामनाएं दी आयोजन समिति के सुरेश जैन और रिंकू जैन ने बताया कि कार्यक्रम में प्रतिदिन श्रीमद भागवत कथा का समय प्रातः 11 से 2 रहेगा वही 3 से 6 भंडारे का आयोजन रहेगा वही प्रतिदिन शाम को श्री हनुमान जी की महा आरती भी की जाएगी प्रतिदिन शाम 8:00 बजे धार्मिक और भजन के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे इसी कड़ी में आज भगवान कृष्ण की रासलीला ओं की प्रस्तुति भारत के श्रेष्ठ कलाकारों द्वारा की जाएगी. वही प्रतिदिन मेले भी भव्य स्तर पर लगाया जा रहा है। Post navigation कल भव्य कलश यात्रा के साथ प्रारंभ होगा फुटतालाब का श्रीहनुमान जयंती महोत्सव संत प्रज्ज्वलित दीपक की तरह होते हैं, उनके संपर्क में आने से हम ज्योतिर्मय हो जाते हैं : देवी चित्रलेखाजी