दिनेश वर्मा झाबुआ 

मध्यप्रदेश के वन विभाग और प्रदेशवासियों के लिए आज का दिन विशेष महत्व रखता है। लगभग 100 वर्षों बाद प्रदेश में जंगली भैंसों की पुनर्बसाहट की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार क्षेत्र में इस परियोजना के दूसरे चरण का शुभारंभ हो रहा है।

मुझे प्रसन्नता है कि लगभग 2,200 किलोमीटर दूर असम से माननीय मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा सरमा जी के सहयोग से जंगली भैंसों को मध्यप्रदेश के प्राकृतिक आवास में पुनः बसाने का निर्णय लिया गया। इसी क्रम में 28 अप्रैल 2025 और 9 मई 2025 को 8 जंगली भैंसों को कान्हा के सूपखार क्षेत्र में लाया गया था। इनमें छह मादा और दो नर जंगली भैंस शामिल हैं।

वर्षाकाल के बाद अब इन्हें बड़े बाड़े में स्थानांतरित कर प्राकृतिक आवास के अनुकूल वातावरण में ढालने की प्रक्रिया के तहत आज दूसरे चरण की शुरुआत हो रही है। हमारा उद्देश्य इनके लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना और इनके संरक्षण को सुनिश्चित करना है।

यह भी उल्लेखनीय है कि 7 अक्टूबर को वीरांगना दुर्गावती के नाम पर स्थापित नए टाइगर रिजर्व में चीतों के तीसरे ठिकाने की शुरुआत की गई। प्रदेश में वन्यजीवों की विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण और उनके लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

बालाघाट जिले में स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। यहां बाघों सहित वन्यजीवों की अनेक प्रजातियां प्राकृतिक वातावरण में पाई जाती हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में चलाए जा रहे सेवा पखवाड़े के दौरान वन्यजीव संरक्षण के इन प्रयासों को आगे बढ़ाना हमारे लिए विशेष महत्व रखता है।

मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। बाघ, चीता, तेंदुआ, घड़ियाल और मगरमच्छ सहित विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण के साथ-साथ उन वन्यजीवों को भी पुनः बसाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जो कभी इस क्षेत्र की प्राकृतिक पहचान हुआ करते थे। प्रदेश में हाथियों की स्थायी मौजूदगी भी वन्यजीव विविधता के विस्तार का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

मैं इस अवसर पर वन विभाग के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों, वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों और प्रदेशवासियों को बधाई देता हूं। मध्यप्रदेश ने वन्यजीवों की पुनर्बसाहट के साथ-साथ मानव बस्तियों के विकास और ग्रामीण जनजीवन को बेहतर बनाने की दिशा में भी प्रयास किए हैं। वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना हमारी प्राथमिकता है।

पिछले लगभग 5 महीनों में बालाघाट क्षेत्र का यह मेरा चौथा दौरा है। यह क्षेत्र में विकास कार्यों, जनजीवन को बेहतर बनाने और वन्यजीव संरक्षण के प्रति हमारी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एक ओर क्षेत्र में शांति और विकास को आगे बढ़ाया जा रहा है, तो दूसरी ओर वन्यजीवों के संरक्षण और पुनर्बसाहट के माध्यम से प्रकृति के संतुलन को मजबूत किया जा रहा है।

मुझे विश्वास है कि जन-सहभागिता, वन विभाग के प्रयासों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा।

– *डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री*

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *