मयंक विश्वकर्मा, आम्बुआ

किसी भी कार्यक्रम की सफलता तब मानी जाती है जब कार्यक्रम बगैर किसी विध्न बाधा के पूर्ण हो जाए,साथ ही उसके उपरांत कार्यक्रम स्थल को पूर्व की भांति स्वच्छ बना दिया गया हो।

क्षेत्र में एक दिन पूर्व आदिवासी संस्कृति के लोकपर्व भोंगरिया का प्रथम आगाज हुआ,दिन भर जहां ग्रामीणों ने धूमधाम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को कायम रखते हुए, आंनद लिया खाने पीने से लेकर झूले चकरी तथा आधुनिक मनोरंजन पर सामर्थ से अधिक खर्च किया, छोटे बच्चों से लेकर युवाओं युवतियों ही नहीं अपितु अपनी उम्र के अंतिम पड़ाव पर जा रहे और आगामी भगोरिया को देख भी सकेंगे या नहीं? अपने कांपते हाथों तथा डगमगाते कदमों के साथ नाती नातिन, पोते पोतियों के सहारे भगोरिया मेले में पुरानी यादों को ताजा करते हुए आधुनिकता के दर्शन करने में पीछे नहीं रहे, लगभग दिन भर मेले का आनंद लिया और घर चले गए उसी के साथ छोटे बड़े वे व्यापारी जिनमें स्थानीय कम बाहरी क्षेत्रों से आए अधिक व्यापारी लाखों का धंधा कर गए मगर उनके जाने के दूसरे दिन जब मेला स्थल को देखा गया तो मैदान तथा हाईस्कूल के पास से लेकर आम्बुआ – जोबट तिराहे के बस स्टैंड सीमा तक केवल और केवल कचरा ही कचरा बिखरा पड़ा था,क़स्बे के अंदर तो पंचायत के सफाई कर्मचारी साफ कर देंगे मगर मेला क्षेत्र में कौन सफाई करेगा ठेकेदार आदि अपनी वसूली कर चले गए और अब वहां स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ती दिखाई दे रही है यहां सफाई कौन करेगा? यह विचारणीय प्रश्न है।

बाजार क्षेत्र में आज सफाई की गई है ,मेला क्षेत्र में भी सफाई कर्मचारी सफाई करेंगे,अब परेशानी नहीं होगी क्योंकि पंचायत के पास कचरा उठाने वाले वाहन की व्यवस्था हो गयी है।

नवल सिंह डुडवे, ग्राम पंचायत सचिव आम्बुआ

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