मयंक विश्वकर्मा, आम्बुआ 

होलिका दहन पूर्व लगभग एक सप्ताह तक लगने वाले साप्ताहिक हाट बाजार के दिन भगोरिया ( भोंगर्या) मेला आम्बुआ में पुलिस तथा प्रशासनिक व्यवस्था के तहत वगैर किसी परेशानी के संपन्न होने के समाचार है।

आदिवासी लोक संस्कृति पर्व भगोरिया जोकि एक खुशहाली का पर्व कहा जाता है क्षेत्र में रबी की फसलें तैयार होने की खुशी में वर्षों से आदिवासी समुदाय होलिका दहन से एक सप्ताह पूर्व साप्ताहिक हाट बाजार के दिन भगोरिया (भोंगर्या) मेले के आयोजन करते आ रहे हैं उसी परम्परा को कुछ परिवर्तन के साथ आज भी समाज मनाता जा रहा है,इन मेलों में रंग बिरंगी पोशाकों में सजे धजे युवक युवतियां तथा छोटे बड़े सभी उत्साह से भाग लेते हैं,।आज आम्बुआ में इस वर्ष का प्रथम भगोरिया पर्व संपन्न हुआ, ग्रामीणों ने जम कर झूले तथा खाने पीने का आनंद उठाया।

भगोरिया मेले में जहां कांग्रेस की ओर से आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल, तथा भील सेना संस्थापक शंकर सिंह बामनिया, तथा सर्व हिंदू सनातन धर्म समिति की ओर से अजय बघेल आदि ने भगोरिया मेले में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई तथा ढोल-मांदल की धुन पर गेर निकाली ,इस वर्ष प्रदेश के बालाघाट, बैतूल तथा धार से आदिवासी संस्कृति की छटा बिखेरने के लिए म प्र शासन के संस्कृति विभाग की ओर से दल भेजे गए थे जिन्होंने लोक नृत्य से सभी का मन मोह लिया।मेले में पुलिस तथा अन्य प्रशासनिक अमले की माकूल व्यवस्था रही विशेष रूप से मेले के झूला क्षेत्र में क्यों यहां झगड़ा फसाद की संभावना अधिक रहती है।कुल मिलाकर कर समाचार लिखे जाने तक शांति बनी हुई थी।

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