देशभक्ति और शिवभक्ति का संगम: स्वतंत्रता दिवस पर 150 कांवड़ियों ने देवझिरी से पिटोल तक निकाली 25 किलोमीटर लंबी यात्रा

0

भूपेंद्र नायक, पिटोल

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति और शिवभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। 15 अगस्त की सुबह स्थानीय पंचायत भवन में झंडावंदन के बाद पिटोल के करीब 150 शिवभक्त कांवड़ यात्रा के लिए रवाना हुए। सभी समाज और आयु वर्ग के ये श्रद्धालु बस से प्रसिद्ध तीर्थ स्थल देवझिरी स्थित संकट मोचन महादेव मंदिर पहुंचे। वहां भगवान शिव के दर्शन करने के पश्चात उन्होंने गोमुख की अविरल जलधारा से पवित्र जल भरा और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ पैदल पिटोल की ओर प्रस्थान किया।

सुबह 11 बजे देवझिरी से शुरू हुई यह 25 किलोमीटर लंबी कांवड़ यात्रा इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग से होते हुए शाम 7 बजे पिटोल पहुंची। नंगे पैर चल रहे इन शिवभक्तों के बोल-बम के नारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा कांवड़ियों का भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान पिटोल के युवाओं ने यात्रियों के लिए फलाहारी खिचड़ी, शीतल जल और मिठाई जैसी बेहतरीन व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित कीं। इस पूरी यात्रा को क्षेत्र के वरिष्ठ जनों के मार्गदर्शन में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया।

विगत 11 वर्षों से लगातार आयोजित हो रही इस विशाल कांवड़ यात्रा में युवाओं के साथ-साथ नन्हे बच्चों का उत्साह विशेष रूप से देखने लायक था। यात्रा का मुख्य आकर्षण 6 वर्षीय बाल कांवड़िया वैदिक नागर रहा। दरअसल, वैदिक के पिता रामकृष्ण नागर उसे केवल कांवड़ियों का उत्साहवर्धन करने के लिए देवझिरी ले गए थे, लेकिन वहां का भक्तिमय माहौल देखकर वैदिक ने भी पैदल चलने की जिद पकड़ ली। बेटे के समर्पण को देखते हुए पिता ने उसका साथ दिया और 6 साल के इस मासूम ने नंगे पैर पूरी 25 किलोमीटर की यात्रा उत्साहपूर्वक तय की। वैदिक के साथ उसका 10 वर्षीय बड़ा भाई शुभ भी शामिल था, जो पिछले 4 वर्षों से निरंतर इस यात्रा का हिस्सा बन रहा है। बाल कांवड़ियों के इन बढ़ते कदमों ने युवाओं में भी नया जोश भर दिया।

पिटोल पहुंचने पर हाईवे पर सभी कांवड़ियों को एकत्रित किया गया और बैंड-बाजे के साथ उन्हें नगर में प्रवेश कराया गया। नगर के सभी शिवालयों में इन कांवड़ियों ने विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और उत्तम वर्षा की कामना की। यात्रा की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन द्वारा कड़े इंतजाम किए गए थे। झाबुआ कोतवाली के सुरक्षाकर्मी देवझिरी से फूलमाल फाटे तक साथ रहे और फिर वहां से पिटोल चौकी के जवानों ने यात्रियों को सकुशल पिटोल तक पहुंचाकर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की। श्रद्धालुओं ने इसे सनातन संस्कृति का जीवंत उदाहरण बताते हुए आने वाली पीढ़ी को अपनी धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का एक सकारात्मक संदेश माना।

Leave A Reply

Your email address will not be published.