व्यक्तित्व विकास से रोजगार तक, विद्यार्थियों ने सीखे सफलता के हुनर

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रितेश गुप्ता, थांदला

शासकीय महाविद्यालय थांदला में स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के तत्वावधान में युवाओं के लिए आयोजित 56 घंटे के रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत व्यक्तित्व विकास एवं सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण का समापन समारोह उत्साह एवं गरिमापूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया।

महाविद्यालय में यह प्रशिक्षण 3 सितंबर 2026 से 30 सितंबर 2026 तक संचालित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों में व्यक्तित्व विकास, संचार कौशल, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, व्यवहारिक दक्षता तथा रोजगार के लिए आवश्यक सॉफ्ट स्किल्स का विकास करना रहा।  समापन समारोह में प्राचार्य डॉ. पीटर डोडियार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में केवल शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यक्तित्व, संवाद-कौशल, सकारात्मक दृष्टिकोण और व्यवहारिक दक्षताएं भी सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रशिक्षण से प्राप्त कौशलों को अपने जीवन एवं करियर में निरंतर उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता डॉ. मीना मावी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “व्यक्तित्व विकास केवल बाहरी व्यक्तित्व को निखारने का नाम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के विचार, व्यवहार, आत्मविश्वास, संवाद और सकारात्मक दृष्टिकोण के समग्र विकास की प्रक्रिया है।” उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर सीखते रहने, अपनी क्षमताओं को पहचानने और बदलते रोजगार परिवेश के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का आह्वान किया। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों का मार्गदर्शन प्रशिक्षक श्री विक्रम सोलंकी द्वारा किया गया। उन्होंने प्रशिक्षण के विभिन्न सत्रों में विद्यार्थियों को व्यक्तित्व विकास, प्रभावी संचार, टीमवर्क, नेतृत्व, समय प्रबंधन, आत्मविश्वास एवं कार्यस्थल पर आवश्यक व्यवहारिक कौशलों से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया।

कार्यक्रम प्रभारी डॉ. राकेश गिरवाल ने प्रशिक्षण की रूपरेखा एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण विद्यार्थियों को अकादमिक शिक्षा के साथ व्यावहारिक एवं व्यावसायिक दक्षताओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। समारोह का संचालन डॉ. राजेंद्र चौधरी ने प्रभावी एवं रोचक ढंग से किया। कार्यक्रम में प्रो. सुनील भाबोर एवं डॉ. ज्ञानेंद्र यादव की भी विशेष सहभागिता रही। प्रशिक्षण में सहभागी विद्यार्थियों कालेब डामोर, माया खपेड, सैम खड़िया, दशरथ एवं पुष्पा खपेड ने प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त अनुभव साझा किए। विद्यार्थियों ने बताया कि प्रशिक्षण के माध्यम से उनके आत्मविश्वास, संवाद-कौशल एवं व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन आया तथा उन्हें भविष्य में रोजगार एवं प्रतियोगी अवसरों के लिए स्वयं को बेहतर ढंग से तैयार करने की प्रेरणा मिली।

कार्यक्रम में महाविद्यालय स्टाफ की ओर से प्रो. मीनाक्षी चौहान, प्रो. सावित्री बामनिया, प्रो. स्वाति नावडे, प्रो. अमरसिंह मंडलोई, डॉ. विजय देवल सहित महाविद्यालय के अन्य अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। समापन अवसर पर प्रशिक्षण में सहभागिता करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में “सीखें, कौशल विकसित करें और रोजगार के लिए स्वयं को तैयार करें” की भावना को सशक्त किया।

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