झाबुआ लाइव के लिए पेटलावद से हरीश राठौड़ की रिपोर्ट- हिजरी 1437 के अंतिम माह जिलहिज रविवार को चांद दिखते ही समाप्त हो गया और प्रथम महीना मुहर्रम हिजरी 1438 शुरू हो गया। बारिश के कारण चांद की शहादत प्राप्त नहीं हुई थी, इसलिए मुहर्रम पर्व की एक तारीख को जुलूस निकाला गया। समाजबंधुओं के लिए वर्ष का पहला माह मुहर्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी माह यौमे आशुरा मनाया जाएगा। हजरत इमाम हुसैन की याद में यौमे आशूरा की रात ताजिये निकलेंगे। निकला चोकी का जुलूस- हुसैनी चौक पर समाजजन अपनी-अपनी चोकी यहां से ढोल नगाड़ों के साथ चौकी का जुलूस शुरू हुआ, जो नगर के प्रमुख मार्गो से होता हुआ पम्पावती नदी पर पहुंचा, यहां चौकी धोने के बाद फातेहा पड़ी गई। पश्चात जुलूस का समापन हुसैनी चौक पर हुआ। मोहर्रम की शुरुआत रविवार शाम से हुई हो किंतु यौमे आशुरा पर निकलने वाले ताजिये कई दिन पहले बनना शुरू हो गए हैं। जुलूस में 15 ताजिये शामिल होंगे। 12 अक्टूबर को मुहर्रम माह की दस तारीख जिसे योमे आशूरा भी कहते हैं ——– Post navigation पुलिस आरक्षक की परीक्षा में 14 विद्यार्थियों का हुआ चयन गरबों में युवक-युवतियों की प्रस्तुति देखकर मंत्रमुग्ध हुए धर्मावलंबी