झाबुआ लाइव के लिए पेटलावद से हरीश राठौड़ की रिपोर्ट-
अनुशासित बालिकाएं विद्यालय का नाम रोशन करने वाली और समाज तथा राष्ट्र का गौरव बढ़ाने वाली होती है घर परिवार से प्राप्त संस्कारों से जीवन में निखार आता है। संस्कारी परिवार ही अपने बच्चों को संस्कारी बना सकते है। जवीन के सर्वांगीण विकास में जीवन विज्ञान का महत्वपूर्ण योगदान साबित हो रहा है। आज विद्यालयों में शारीरिक और बौद्धिक विकास पर अवश्य ध्यान दिया जा रहा है. किन्तु मानसिक और भावात्मक विकास के अभाव में वह परिपूर्ण नहीं बन पा रहा है। उक्त विचार आचार्य महाश्रमण के सुशिष्य मुनिश्री पृथ्वीराज जसोल ने शासकीय कन्य उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में बालिका वर्ग और शिक्षिका वर्ग को सम्बोधित करते हुए मंगलवार को व्यक्त किए। मुनि चैतन्य कुमार अमन ने कहा- दीपावली का पर्व ज्योति का पर्व है, प्रत्येक कन्या अपने जीवन को ज्ञान ज्योति से ज्योतित करने का प्रयास करें, अभय, मृदुला, सत्य,सरलता, धैर्य, अनाशक्ति, स्वावलम्बन, आत्मानुशासन, सहिष्णुता, कर्तव्यनिष्ठा, प्रमाणिकता, सेवा और व्यक्तिगत संग्रह की सीमा- ये तेरह एसे जीवन मूल्य है जिनको अपनाकर विद्यार्थी जीवन को सर्वोच्च बना सकते है। मूल्यपरक शिक्षा के अभाव में जीवन के मूलभूत तत्वों की विस्मृति हो रही है। इसलिए आज शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तन की अपेक्षा की जा रही है, शिक्षा का मूलभूत उद्ेश्य है- जीवन विकास और चारित्र निर्माण, शक्ति जागरण की दृष्टि से कन्याओं को शिक्षा और स्वावलम्बन के क्षेत्र में गति करने पर ध्यान देना होगा जिससे संस्कार पुष्ट बन सकेंगे। मुनि अतुल कुमार ने कहा- प्रत्येक बालिका में अनेक संभावनाएं है, उन्हे उजागर करने की अपेबा है बालिकाएं अपने आपकों हीन नहीं समझे आज राष्ट्र और समाज की सोच में बहुत बदलाव आया है। अपने सपनों को साकार करने की संभावनाओं को तलाशकर आत्मनिर्भर बनने वाली कन्या दूसरों का आलम्बन बन सकती है। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य योगेंद्र प्रसाद ने मुनिवृंद का स्वागत और आभार मानते हुए विद्यालय में चलने वाली गतिविधियों से परिचय करवाया। तेरापंथी सभा के अध्यब झमकलाल भंडारी और सोहनलाल भंडारी ने प्राचार्य को प्रेक्षाध्यान जीवन विज्ञान साहित्य से सम्मानित किया। कार्यक्रम में कन्याओं ने अणुव्रत गीत से मंगलाचरण किया और तेरापंथ सभा के मंत्री लोकेश भंडारी ने संचालन किया।

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