अलीराजपुर लाइव के लिए खट्टाली से विजय मालवी की रिपोर्ट-
जोबट विकासखंड की ग्राम पंचायत बड़ीखट्टाली में ब्लॉक स्तरीय लोक कल्याण शिविर संपन्न हुआ। शिविर में एसडीएम तथा जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी साकेत मालवीय, तहसीलदार अजमेर सिंह गोड, नवीन श्रीवास्तव, सरपंच समाबाई, भारत सिंह, सांसद प्रतिनिधि रमेश मेहता जोबट, सचिव मेंहताब सिंह, डॉक्टर केसी गहलोत तथा विभिन्न विभाग के अधिकारी व पंचायत सचिव एवं रोजगार सहायक तथा ग्राम पंचायत चमार बेगड़ा के सरपंच राघु सिंह, खारी सरपंच सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। शिविर में एसडीएम साकेत मालवीय ने शासन की विभिन्न योजनाओं पर सविस्तार प्रकाश डाला। तथा 26 जनवरी 2017 तक सारे शौचालय अनिवार्य रूप से बनाने के निर्देश उपस्थित सचिव एवं रोजगार सहायकों को दिए आपने कहा कि इसमें कतई लापरवाही सहन नहीं की जाएगी। हमारा प्रमुख लक्ष्य ग्राम पंचायत में शत-प्रतिशत शौचालय का निर्माण हो ग्राम चमार बेगड़ा में शौचालय निर्माण की धीमी गति पर असंतोष जाहिर किया तथा तहसीलदार को इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए। इस अवसर पर तहसीलदार गोड में भी शासन की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए शौचालय बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का नियामित क्रियान्वयन हो। हर पंचायत को अपने लक्ष्य अनुसार शौचालय बनाना आवश्यक है। इस अवसर पर बीइओ नवीन श्रीवास्तव में भी शासन की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। महिला बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर खोड़े ने भी महिला बाल विकास योजनाओं की जानकारी दी। शिविर में मात्र 5 आवेदन प्राप्त हुए जिसमें एक राजस्व विभाग, दो सड़क योजना एवं एक गरीबी रेखा में नाम दर्ज करने का आवेदन प्राप्त हुआ ।शिविर में जोबट से बड़ी खट्टाली व्हाया कंदा खेरवा एवं जोबट से चमार वेगड़ा खट्टाली मार्ग की हालत अत्यंत जर्जर दयनीय होने का मामला मामला स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि एवं जोबट ब्लाक के सांसद प्रतिनिधि रमेश मेहता ने उठाया इस पर शिविर प्रभारी ने बताया कि वास्तव में उक्त मार्ग की हालत अत्यंत जर्जर है। इस संबंध में संबंधित विभाग को लिखा जा रहा है। मेहता ने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री हेल्प लाइन पर भी शिकायत दर्ज करवाई जा रही है। इस संबंध में मेहता ने सांसद कांतिलाल भूरिया को भी क्षेत्र में जर्जर रोड निर्माणों की दुर्दशा की जानकारी दी। मार्गों की स्थिति को लेकर ग्रामीणों का भी विशेष आक्रोश देखा गया, नहीं तो ग्रामीणों को मजबूर होकर आंदोलन करना पड़ेगा।

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