झाबुआ लाइव के लिए पेटलावद से हरीश राठौड़ की रिपोर्ट- एक बच्चे ने जन्म से पहले ही अपने पिता को खो दिया, जब इस हादसे में करडावद ग्राम का दुलेसिंग मुणिया दिवंगत हुआ, तब उसकी 2 साल की बेटी के साथ उसकी पत्नी को 3 माह का गर्भ था। इस हादसे ने पेशे से मिस्त्री दुलेसिंग की मृत्यु ने न केवल एक पत्नी ने अपना पति खोया बल्कि एक नवजात को भी अनाथ बना गया। अब 2 बच्चों के साथ दुलेसिंह की विधवा संगीता का जीवन इस दौरान संघर्ष में बीत रहा है। हालांकि उसे मुख्यमंत्री की घोषणा से समीप ग्राम रामगढ़ में रसोयन का कार्य मिल गया है, जिससे वो अपनी जीवन की गाड़ी को चला रही है। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी मकान भी नहीं मिल पाया। इसके साथ ही पेंशन नहीं मिल पाया। Post navigation पेटलावद ब्लास्ट के पीडि़तों पर प्रदेश सरकार का नहीं है ध्यान, इलाज के लिए ठोंकरे खाने को मजबूर : कांग्रेस विक्रम चौहान के भजनों पर झूमा कुंदनपुर