https://jhabualive.com/wp-content/uploads/2026/01/WhatsApp-Video-2026-01-17-at-6.15.19-PM.mp4 जितेंद्र वाणी, नानपुर आदिवासी बहुल जिला आलीराजपुर भले ही शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा माना जाता हो, लेकिन यहां एक दिव्यांग शिक्षिका ने अपने संघर्ष और जज़्बे से शिक्षा की अलख जगा दी है। धार जिले के कुक्षी क्षेत्र की रहने वाली शिक्षिका लक्ष्मी कन्नौज, जो दोनों पैरों से विकलांग हैं, वर्तमान में आलीराजपुर जिले के माध्यमिक विद्यालय फाटा में पदस्थ हैं। वे रोज़ाना बस स्टॉप से स्कूल तक अपने घुटनों के बल, पैरों पर प्लास्टिक की थैली बांधकर और हाथों में चप्पल पहनकर रेंगते हुए स्कूल पहुंचती हैं। न उनके पास साइकिल है और न ही ई-बाइक, फिर भी उनका हौसला कभी कमजोर नहीं पड़ा। बच्चे रोज़ अपनी शिक्षिका के आने का बेसब्री से इंतजार करते हैं। लक्ष्मी कन्नौज न सिर्फ बच्चों के लिए प्रेरणा हैं, बल्कि उन शिक्षकों के लिए भी मिसाल हैं जो संसाधनों के बावजूद अपने कर्तव्यों से पीछे हटते हैं। शासन-प्रशासन को चाहिए कि इस संघर्षशील शिक्षिका को सम्मानित करें और उन्हें ई-बाइक या साइकिल जैसी सुविधा उपलब्ध कराए, ताकि उनका सफर थोड़ा आसान हो सके। Post navigation करोड़ों की टंकियां शोपीस बनीं, अफसरों की लापरवाही से ग्रामीण और बच्चे पी रहे फ्लोराइड युक्त पानी ई-विकास प्रणाली अंतर्गत जिला आलीराजपुर के नानपुर सहकारी संस्था द्वारा प्रथम ई-टोकन जारी