झाबुआ लाइव के लिए रायपुरिया से लवेश स्वर्णकार की रिपोर्ट-
ग्रामीण कह रहे कि शनिवार और रविवार को बैंक खुले रखे जाने के निर्देश थे जिसके तात्पर्य था कि लोगों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े लेकिन यह क्या रायपुरिया की नर्मदा झाबुआ ग्रामीण बैंक में तो रविवार को न तो विड्राल से पेमेंट का भुगतान हुआ और न ही पुराने नोटों का एक्सचेंज हुआ, ग्रामीण बैंकों से पैसा निकालने के लिए लंबी-लंबी कतारे लगाकर बैंक खुलने के पहले से ही खड़े थे लेकिन यहां केश नहीं होने के कारण यह बोल दिया गया कि 500 और 1000 के पुराने नोट को एक्सचेंज नहीं किया गया जिससे लोगों की दिक्कत ओर बढ़ गई। आज रायपुरिया का हाट बाजार होने के कारण काफी संख्या में लोग अपनी जरुरत का सामान लेने रायपुरिया पहुंचे थे प्रचलन से बाहर हुए 500 और 1000 के नोट के बदले जब ग्रामीण इस बैंक में पहुंचे तो उन्हें नोटों एक्सचेंज नहीं किया गया। रविवार बाजार का दिन होने के बाद भी बैंक में केश नहीं मिल पाया जिससे ग्रामीणों ने सरकार को खूब कोसा। ग्रामीण शंभूलाल, जितन्द्र, शेरसिंह, निलेश और राकेश तो यह कह रहे की बैंक में हम गरीबों की कम और रसूखदारों की सेवा ज्यादा हो रही है। ग्रामीणों को लंबी-लंबी लाइन लगने के बाद भी केश नहीं मिल रहा। उधर बाजारों में रसूखदार लोग प्रचलन से बाहर हुए 500 और 1000 के नोटों पर गरीबों की खून-पसीने की कमाई का 1000 की जगह 800 और 500 की जगह 400 रुपए देकर गला काट स्पर्धा शुरू कर चुके हैं। और इधर बैंक में केश नहीं होने की बात कही जा रही है जिससे गरीबों की मुसीबतों को बढ़ा दिया है।
हाट बाजार के दिन व्यापारियों को परेशानी-
रसूखदारों को छोड़कर सुबह से शाम सड़को के किनारे अस्थाई दुकान लगाकर व्यापार करने वाले छोटे दुकानदारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। इधर बैंकों से 100 रुपए 50 और दस-बीस रुपए के नोट मिल नहीं रहे है और दूसरी और रसूखदार सौ-पचास और दस-बीस के नोटो को प्रचलन से बाहर हुए नोटों के बदले कालाबाजारी में व्यस्त है, जिससे बाजार वाले दिन भी छोटे व्यापारियों के व्यापार तो नहीं हो रहा है बल्कि उनकी मुसीबतों में इजाफा जरूर हो चुका है।
जिम्मेदारों की सुनो-
अगर इस तरह की समस्या है तो मैं बात करके समस्या का हल करवाता हूं।
                                                 – सीएस सोलंकी एसडीएम
-पेटलावद एसबीआई से केश नहीं मिल पाया आज तो 99 फीसदी पेमेंट आने की संभावना भी नहीं है। ग्रामीणों के समस्या समझ सकता हूं, लेकिन केश नहीं मिल रहा है तो दिक्कत आ रही है
                                     – श्रीवास्तव, बैंक मैनेजर
                                  नर्मदा झाबुआ ग्रामीण बैंक रायपुरिया

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