मयंक विश्वकर्मा, आम्बुआ हिंदू सनातन धर्मावलंबियों का विशेष पर्व जो कि माघ मास में मनाया जाता है,मकर संक्रांति पर्व आज क्षेत्र में परंपरागत तरीके से मनाया गया, मंदिरों में सुबह से ही पूजा अर्चना तथा आरती का क्रम चलता रहा, आस्थावानों ने भगवान को गुड़ तिल्ली के लड्डूओं का भोग लगाया, आज एकादशी व्रत होने के कारण चांवल दाल की खिचड़ी का भोग नहीं लगाया जा सका । दिन भर आसमान पर पतंग बाजी होती रही तथा पतंगें कटती रही और बच्चे उन्हें लूटते रहे जिस कारण बाजार गलियों में दिन भर पतंगें पकड़ने वालों का शोर गूंजता रहा। इसी के साथ साथ कुछ युवक युवतियां अपने अपने झुंड बनाकर गिल्ली डंडा भी खेलते हुए नजर आए यह मकर संक्रांति पर्व खेले जाने वाले खेलों में प्रमुख है। जिन्हें आज भी जीवित रखने कि प्रयास किया जा रहा है।आज ही सुहागिनों द्वारा सुहाग सामग्री का आदान-प्रदान किया गया तथा गुड़ तिल्ली के लड्डूओं का आदान-प्रदान भी किया गया,गाय तथा कुत्तों को लड्डू जलेबी आदि खिलाई गई। साथ ही मंदिरों में तथा ब्राह्मणों को दान दक्षिणा भी दी गई, हालांकि इस त्योहार पर महंगाई की छाया भी बनी रही क्योंकि तिल्ली तथा गुड़ के भाव आसमान पर रहे ,इस लिए त्योहार एक औपचारिकता बनकर रह गया है। Post navigation आम्बुआ में प्रशासन ने सरकारी जमीन पर से अतिक्रमण हटाना शुरू किया आम्बुआ में आनंद उत्सव के तहत खेल स्पर्धाएं हुई