महेश पटेल खनिज नीलामी से प्रभावित गांवों की जमीन को लेकर जोबट में कांग्रेस की रायशुमारी, विधानसभा से सड़क तक संघर्ष का ऐलान

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जितेंद्र वर्मा, जोबट

खनिज नीलामी से प्रभावित आदिवासी गांवों की जमीन, जल-जंगल-जमीन और किसानों के अधिकारों को लेकर कांग्रेस ने आंदोलन की तैयारी तेज कर दी है। सोमवार को जोबट विधायक सेना महेश पटेल एवं आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल के नेतृत्व में जोबट विधायक कार्यालय में प्रभावित ग्रामों के ग्रामीणों के साथ बैठक आयोजित कर आगामी आंदोलन की रूपरेखा पर चर्चा की गई। इसके बाद चंद्रशेखर आजाद नगर के डाक बंगले में भी प्रभावित ग्रामीणों से रायशुमारी की गई।
बैठक में ग्रामीणों ने खनिज नीलामी एवं जमीन से जुड़े मामलों को लेकर अपनी समस्याएं और आपत्तियां नेताओं के सामने रखीं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह मामला केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी किसानों की जमीन, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।
भाजपा सरकार पर महेश पटेल का तीखा हमला
आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में भाजपा की सरकार है, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हैं और नागर सिंह चौहान स्वयं कैबिनेट मंत्री हैं, तो उन्हें अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना और ज्ञापन देने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
महेश पटेल ने सवाल किया कि “अगर एक कैबिनेट मंत्री की बात सरकार में नहीं सुनी जा रही है, तो आम आदिवासी, किसान और गरीब की सुनवाई कैसे होगी?”
उन्होंने कहा कि मंत्री को कलेक्टर कार्यालय के बजाय कैबिनेट में मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए। यदि जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग है तो कैबिनेट में प्रस्ताव रखकर मुख्यमंत्री से निर्णय करवाना चाहिए।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “सरकार आपकी, मुख्यमंत्री आपके, कैबिनेट आपकी और प्रशासन भी आपकी सरकार का है, फिर धरना किसके खिलाफ और ज्ञापन किसको?”
“कांग्रेस गलत थी तो भाजपा नेता अब उसी मुद्दे पर क्यों आंदोलन कर रहे?”


महेश पटेल ने कहा कि जब कांग्रेस द्वारा जमीन के मुद्दे को उठाया गया था, तब भाजपा नेताओं की ओर से कांग्रेस पर अफवाह फैलाने और किसानों को गुमराह करने के आरोप लगाए गए थे। अब भाजपा के ही मंत्री और पदाधिकारी अपनी सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
उन्होंने सवाल किया कि यदि कांग्रेस द्वारा उठाया गया मुद्दा गलत था तो भाजपा नेता अब उसी विषय को लेकर आंदोलन क्यों कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि जनता इस पूरे मामले का जवाब चाहती है।
आदिवासी जमीन के मुद्दे पर विधानसभा में उठेगी आवाज
जोबट विधायक सेना महेश पटेल ने कहा कि आदिवासी समाज की जमीन केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि उसकी पहचान, आजीविका और भविष्य है। उन्होंने कहा कि खनिज नीलामी से प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के अधिकारों को लेकर विधानसभा में भी आवाज उठाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में इस मामले को प्रमुखता से उठाया जाएगा और प्रभावित क्षेत्रों से जुड़े सवाल विधानसभा में लगाए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर आदिवासी विधायकों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।
विधायक ने कहा कि “हम अपने आदिवासी समाज की जमीन की लड़ाई विधानसभा में भी लड़ेंगे और जरूरत पड़ी तो सड़क पर भी उतरेंगे। किसानों को डरने की जरूरत नहीं है।”
प्रभावित गांवों में जनसंवाद बढ़ाने की तैयारी
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं और सुझाव सामने रखे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रभावित ग्रामों में जनसंवाद को और बढ़ाया जाएगा तथा आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
महेश पटेल ने कहा कि यदि सरकार का दावा है कि किसानों की जमीन प्रभावित नहीं होगी तो सरकार को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए लिखित जवाब देना चाहिए। साथ ही आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े संदिग्ध मामलों के दस्तावेजों की जांच की मांग भी उन्होंने उठाई।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की लड़ाई गांव से लेकर विधानसभा तक जारी रहेगी और किसानों की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा।

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