एएसआई ईश्वर सिंह कटारिया 42 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त, विदाई समारोह आयोजित किया

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फिरोज खान, चंद्रशेखर आजाद नगर

चंद्रशेखर आजाद नगर (भाबरा) थाने में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) ईश्वर सिंह कटारिया अपनी 42 वर्षों की गौरवपूर्ण और निष्कलंक शासकीय सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर थाना प्रांगण में एक भव्य विदाई सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

थाना प्रभारी शिवराम तरोले ने कटारिया को शॉल, श्रीफल और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। वहीं, सेजावाड़ा चौकी प्रभारी जयवीर भदौरिया, बरझर चौकी प्रभारी शिवा तोमर और एएसआई तिलकराज सिंह सहित समस्त पुलिस स्टाफ ने पुष्पमाला पहनाकर उनका आत्मीय स्वागत किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। समारोह को संबोधित करते हुए थाना प्रभारी शिवराम तरोले ने कहा कि कटारिया ने पुलिस विभाग में 42 वर्षों तक पूरी ईमानदारी, निष्ठा और बेहतर समन्वय के साथ कार्य किया है। उनका बेदाग सेवानिवृत्त होना काबिले-तारीफ है।

बरझर चौकी प्रभारी शिवा तोमर ने कहा, “पद में भले ही हम बड़े हों, लेकिन कटारिया जी जैसे वरिष्ठ और अनुभवी साथियों से विभाग में बहुत कुछ सीखने को मिलता है। हमने उनसे कार्यशैली के कई गुण सीखे हैं।” सेजावाड़ा चौकी प्रभारी भदौरिया ने भी उनके सुखद और स्वस्थ सेवानिवृत्त जीवन की कामना की।

1984 से शुरू हुआ था सेवा का सफर

ईश्वर सिंह कटारिया वर्ष 1984 में इंदौर पुलिस विभाग में भर्ती हुए थे। इसके बाद उन्होंने 1986 में राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से दो वर्षीय प्रशिक्षण प्राप्त किया।

1986 से 1992 तक उन्होंने इंदौर के विभिन्न थानों में अपनी सेवाएं दीं।

वर्ष 1992 में पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उनका स्थानांतरण झाबुआ हुआ।

इसके बाद से वे झाबुआ और आलीराजपुर जिले के विभिन्न थानों में निरंतर कर्तव्यनिष्ठ बने रहे, जहां सराहनीय कार्यों के लिए समय-समय पर विभाग द्वारा उन्हें सम्मानित भी किया गया।

ड्यूटी को परिवार मानकर काम करें तो कभी थकान महसूस नहीं होती: कटारिया

विदाई के अवसर पर भावुक होते हुए एएसआई ईश्वर सिंह कटारिया ने कहा, “पुलिस विभाग में सेवा देना मेरे लिए गर्व की बात रही। मुझे हर पदस्थापना पर सहयोगियों और वरिष्ठ अधिकारियों का भरपूर स्नेह मिला। अक्सर युवा कहते हैं कि पुलिस की नौकरी में 24 घंटे काम रहता है, त्योहारों और रविवार को भी छुट्टी नहीं मिलती। लेकिन यदि आप अपने कार्यस्थल और स्टाफ को परिवार का हिस्सा मान लें, तो कभी भी छुट्टियों की कमी या सेवा का दबाव महसूस नहीं होता।”

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