झाबुआ। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया ने कहा कि भाजपा जनहितेषी होने का कितना ही ढोंग क्यों न करे लेकिन भीतर से वह एक जनविरोधी पार्टी है और सत्ता में आने के बाद जनता से बहुत दूर चली जाती है। प्रदेश में फसल की बर्बादी, प्राण लेवा कर्ज के बीच और सरकार की बेरूखी से दुःखी किसान हर रोज बे-मोत मर रहे हंै। व्यापमं और छात्रवृत्ति जैसे बड़े-बड़े घोटाले थम नहीं रहे तथा भ्रष्टाचार ने सारी सीमाएं लांघ डाली है। ऐसी स्थिति में भाजपा शिवराजसिंह चोहान के मुख्यमंत्री काल के दस साल पूरे होने पर ‘‘दस साल बेमिसाल’’ के नाम से नाच-गाने का जश्न मनाने जा रही है। साफ जाहिर है कि भाजपा को प्रदेश की जनता की तकलीफों, विकास के पैसों की लूट-खसोर और घोटालों की बाढ़ को रोकने तथा किसानों के आंसू पोंछने की कोई चिंता नहीं है। दरअसल भाजपा के लिए प्रदेश और प्रदेशवासियो के हितो की तुलना में शिवराजसिंह का महिमामंडन मुख्य हो गया है।
किसानों के साथ छलावा
आजा जारी बयान में वरिष्ठ आदिवासी नेता भूरिया ने कहा कि इन दिनो प्रदेश के कई जिलो के किसान सोयाबीन की फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाने और कर्ज वसूली के रोज-रोज के तकाजो से इतने ज्याद दुःखी हो चुके है कि हर रोज उनकी अकाल मोतों की खबरेें आ रही है। ऐसे अभुतपूर्व संकट के समय मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चोहान को संकटग्रस्त किसानों के साथ खड़ा होकर उनकी मदद करना चाहिए थी, किंतु वे विदेशों में तफरीह करते घूम रहे है। शायद वे विदेश यात्रा के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की राह पर चल पडे़ है और मुख्यमंत्री रहते सारी दुनिया घूम लेना चाहते है। बाते तो खेती को लाभ का धंधा बनाने की करते है और खेती की दुर्दशा की तरफ पलट कर भी नहीं देखते।
भाजपा का काम भ्रम फैलाना
पेटलावद विस्फोटक कांड में सौ से ज्यादा निर्दोष लोग मोत के शिकार हो गए, लेकिन न तो पीडित परिवारों को ठीक से मदद हो रही है और न ही विस्फोट का असली गुनहगार भाजपा व्यापारिक प्रकोष्ठ का नेता राजेन्द्र कासवा गिरफ्तार हुआ है। एक महीना होने जा रहा है, लेकिन पुलिस अभी उस तक नहीं पहुंच पाई है। भ्रम फैलाने के लिए एक लाख रूपये का इनाम घोषित करके सरकार चुप बैठी है। सवाल है कि राजेन्द्र कासवा को भगोड़ा घोषित कर उसकी करोड़ों की संपत्ति कुर्क क्यों नही की जा रही है। कांसवा को दबोचने में पुलिस इस कारण नाकाम साबित हो रही है कि शायद वह सत्तारूढ़ भाजपा के किसी रसुखदार नेता की पनाह में छीपा हुआ है।
किसानो को नहीं मिल रहा मुआवजा
मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता पर सवालिया निशान लगाते हुए भूरिया ने कहा हि कि राज्य के 16 जिलों में सूखे के हालात पैदा हो गए है। कलेक्टरों ने 494 करोड की मदद मांगी है, परंतु सरकार चुप्पी साधे बैठी है। दूसरी तरफ जिन 25 लाख किसानों ने सोयाबीन बोया था, वह 40 से 70 प्रतिशत फसल बर्बाद होने से गंभीर संकट में है और मजबूर होकर मोत को गले लगा रहे है। इस मामले में मुख्यमंत्री कोई रूचि नहीं ले रहें है। इस कारण नुकसान के मुआवजे के भुगतान के कही कोई आसार नजर नहीं आ रहें है। पिछले साल का मुआवजा भी अभी तक किसानों को नहीं मिला है।
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