भूपेंद्र नायक, पिटोल मध्यप्रदेश-गुजरात सीमा के समीप अनास गांव के पास स्थित जूना पानी में तीन दिवसीय माता शबरी नवधा भक्ति रामकथा का आयोजन किया गया। कार्यसिद्ध हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित कथा में गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान से हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। कथा के दौरान आयोजकों ने 85 परिवारों की सनातन धर्म में वापसी होने का दावा किया। आयोजन में जनजातीय समाज सहित सर्व हिंदू समाज के लोगों ने सहभागिता की। सौराष्ट्र निंबार्क धाम मोटा मंदिर, लिंबड़ी के महामंडलेश्वर महंत 1008 ललित किशोर दास महाराज ने कथा का वाचन किया। उन्होंने माता शबरी की नवधा भक्ति के नौ स्वरूपों का वर्णन करते हुए संतों की संगति, भगवान की कथा में प्रेम, गुरु सेवा, भजन, नाम जप, इंद्रिय संयम, संतोष, सरलता और कपटरहित व्यवहार को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी जो व्यक्ति अपने अच्छे आचरण और कर्तव्य पर कायम रहता है, वही वास्तविक अर्थों में विजयी होता है। प्रवचन के दौरान महाराज ने जनजातीय समाज के लोगों से अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की अपील की। उन्होंने धर्म परिवर्तन कर चुके परिवारों से संवाद और समझाइश के माध्यम से मूल धर्म में लौटने का आग्रह किया। भजन संध्या में उमड़ी भीड़ आयोजन के दूसरे दिन गुजरात के प्रसिद्ध भजन गायक माया भाई आहिर की डायरा भजन संध्या हुई। रात 9 बजे से सुबह 3 बजे तक चले कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। तीनों दिन कथा स्थल पर संतों का समागम रहा। समापन पर आरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी भंडारे का आयोजन किया गया। 75 महिला-पुरुषों ने जगाया धर्म अलख सौराष्ट्र के निंबार्क धाम लिंबड़ी से करीब 600 किलोमीटर दूर से आकर 75 महिला-पुरुषों ने ग्राम अनास के आसपास के गांव में जाकर धर्म जागरण किया। कथा में आने का आमंत्रण सौराष्ट्र के निंबार्क धाम से जुड़े हुए इन 75 लोगों ने आदिवासी संस्कृति के गांव में जाकर रहन-सहन के साथ धर्म जागरण के लिए अपने प्रयास किया एवं कई परिवारों को सनातन हिंदू धर्म में वापसी करवाई Post navigation आदिवासी सीनियर बालक छात्रावास में दीपों से उकेरा भारत और मध्यप्रदेश का नक्शा