आलीराजपुर। राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित ऐतिहासिक मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने, जनजातीय बलिदानियों के इतिहास को उचित सम्मान दिलाने और स्थल के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संरक्षण की मांग को लेकर गुरुवार को आलीराजपुर कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा गया। अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के केंद्रीय कार्यकारी मंडल की ओर से पारित प्रस्ताव के आधार पर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मध्यप्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया गया। इसमें राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश की सरकारों से भी मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए सहयोग करने की अपील की गई।

ज्ञापन में मानगढ़ धाम को वागड़ का जलियांवाला बाग बताते हुए कहा गया कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसके बावजूद जनजातीय बलिदानियों के संघर्ष और उनके इतिहास को अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया है। संगठन ने मांग की कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर वहां के ऐतिहासिक महत्व के अनुरूप संरक्षण एवं विकास कार्य किए जाएं।

संत गोविंद गुरु के नेतृत्व में चला था भगत आंदोलन

ज्ञापन के अनुसार, 17 नवंबर 1913 को राजस्थान के बांसवाड़ा जिले की मानगढ़ पहाड़ी पर अंग्रेजी शासन ने गोलीबारी की थी। यह घटना संत गोविंद गुरु के नेतृत्व में चल रहे भगत आंदोलन को दबाने के दौरान हुई थी। इस नरसंहार में 1500 से अधिक जनजातीय महिला-पुरुषों और बच्चों के बलिदान का उल्लेख किया गया है।

संगठन ने कहा कि मानगढ़ की घटना जलियांवाला बाग हत्याकांड से छह वर्ष पहले हुई थी। इसके बावजूद इस ऐतिहासिक घटना को राष्ट्रीय स्तर पर वह पहचान नहीं मिल सकी है, जिसकी वह हकदार है। ज्ञापन में भगत आंदोलन को जनजातीय समाज की अस्मिता, संस्कृति, आस्था और जीवन मूल्यों को जागृत करने वाला आंदोलन बताया गया है।

इस आंदोलन ने दक्षिण राजस्थान के भील समाज को अपनी सांस्कृतिक पहचान और अधिकारों के प्रति जागरूक किया। संत गोविंद गुरु के नेतृत्व में चले इस आंदोलन ने वन सहित अन्य औपनिवेशिक कानूनों और अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनजागरण किया। ज्ञापन में कहा गया कि इस संघर्ष ने राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के जनजातीय क्षेत्रों में स्वतंत्रता आंदोलन की भावना को मजबूत किया।

राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर सुरक्षित किए जाएं ऐतिहासिक साक्ष्य

ज्ञापन में केंद्र सरकार से मांग की गई कि मानगढ़ धाम को बिना देरी राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए। इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए संरक्षण एवं विकास की योजनाएं बनाई जाएं। संगठन का कहना है कि इस स्थल पर घटना से जुड़े कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक साक्ष्य सामने लाने की संभावनाएं हैं। उचित संरक्षण और अध्ययन से स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज की भूमिका को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।

ज्ञापन में प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि देश में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े अनेक स्थलों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। ऐसे में मानगढ़ धाम को भी उसके ऐतिहासिक महत्व के अनुरूप पहचान मिलनी चाहिए। संगठन ने यह भी कहा कि जनजातीय समाज के बलिदान को सम्मान देना केवल किसी एक समुदाय का विषय नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की ऐतिहासिक विरासत और गौरव से जुड़ा मुद्दा है।

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के दौरे का दिया हवाला

ज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 1 नवंबर 2022 को मानगढ़ धाम पहुंचने का उल्लेख किया गया। इस दौरान उन्होंने मानगढ़ धाम की गौरव यात्रा कार्यक्रम में भाग लेकर वहां के बलिदानियों और जनजातीय समाज की विरासत को नमन किया था।

इसके अलावा राष्ट्रपति के 4 अक्टूबर 2024 को मानगढ़ धाम पहुंचकर जनजातीय बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का भी उल्लेख किया गया। संगठन ने इन कार्यक्रमों का हवाला देते हुए कहा कि मानगढ़ धाम के ऐतिहासिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

ज्ञापन में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की ओर से मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में मान्यता देने की संस्तुति का भी उल्लेख किया गया। इसके अनुसार, आयोग ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सेवानिवृत्त निदेशक डॉ. धर्मवीर शर्मा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय दल गठित किया था। इस दल ने अगस्त 2022 में मानगढ़ धाम के ऐतिहासिक महत्व और जनजातीय बलिदानों का अध्ययन कर शोध आधारित रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत की थी।

तीन राज्यों की पाठ्य-पुस्तकों में शामिल हो मानगढ़ का इतिहास

संगठन ने राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश सरकारों से मांग की कि वे मानगढ़ धाम के संरक्षण एवं विकास में सहयोग करें। साथ ही तीनों राज्यों के स्कूलों और कॉलेजों की पाठ्य-पुस्तकों में मानगढ़ के गौरवशाली इतिहास को उचित स्थान दिया जाए।

ज्ञापन में कहा गया कि स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। पाठ्य-पुस्तकों में इस इतिहास को शामिल करने से विद्यार्थियों को देश की आजादी के संघर्ष में जनजातीय समुदायों की भूमिका और उनके बलिदानों की जानकारी मिलेगी।

इसके साथ ही संगठन ने क्षेत्र के सामाजिक-धार्मिक नेताओं और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से सभी मतभेदों को भुलाकर इस विषय पर एकजुट होकर प्रयास करने की अपील की। संगठन का कहना है कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलने से जनजातीय समाज की अस्मिता, गौरव और ऐतिहासिक विरासत को उचित सम्मान मिलेगा।

ये कार्यकर्ता रहे उपस्थित

ज्ञापन सौंपने के दौरान जनजाति सुरक्षा मंच के जिला संयोजक नरिंग मोरी, जिला सह-संयोजक कमरु अजनार, आश्रम समिति सदस्य मुकाम सिंह डावर, विनय कालूसिंह चौहान, गोविंद भयड़िया, जयपाल खरत, विक्रम भयड़िया, मांगीलाल रावत, खुमान सिंह मंडलोई, खुमाना चौहान, भेरू चौहान, मनसिंह तोमर, शंकर निगवाल और मगन सिंह चौहान सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यकर्ताओं ने मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने और जनजातीय बलिदानियों के इतिहास को उचित स्थान दिलाने की मांग की।

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