किसी ने 12वीं के साथ किया नीट, किसी ने नीट और जेईई मैन्स दोनों, प्रतिभा देख प्रभावित हुए सीएम डॉ. मोहन
दिनेश वर्मा झाबुआ
भोपाल। स्कूली छात्रों के लिए 1 सितंबर का दिन बेहद खास रहा। इन छात्रों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इतना प्रभावित किया कि वे बच्चों की तारीफ करने से खुद को रोक नहीं सके। इन स्कूली छात्रों की प्रतिभा देख लोग हैरान थे और हर बात पर तालियों से उनका स्वागत कर रहे थे। सीएम डॉ. यादव जिन छात्रों से मिले, उनमें से कुछ बच्चों ने तो 12वीं के साथ-साथ नीट और जेईई मैन्स भी क्लीयर कर लिया था। ये सुनकर प्रदेश के मुखिया ने खुद बच्चों के लिए तालियां बजवाईं। मौका था भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में आयोजित ‘प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना’ कार्यक्रम का। कार्यक्रम के तहत सीएम डॉ. यादव ने 12वीं में 75% से ज्यादा नंबर लाने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप दिया। उन्होंने 1 लाख 21 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 304 करोड़ रुपए से अधिक की राशि उनके खातों में ट्रांसफर की। इस तरह हर विद्यार्थी के खाते में 25-25 हजार रुपये आए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में 10 विद्यार्थियों को मंच पर लैपटॉप प्रदान किए। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि सीएम डॉ. यादव ने विद्यार्थियों के साथ रिमोट का बटन क्लिक करवाकर रुपये ट्रांसफर कराए।
गौरतलब है कि, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंच पर ही विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने छात्रों से पूछा कि वे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं। छात्र वीरेंद्र सिंह बुंदेला ने कहा कि मैं राजनेता बनना चाहता हूं। इस पर सीएम डॉ. यादव ने कहा कि यह भी हमारे लिए जरूरी है। बच्चे राजनेता बनकर देश को दिशा देने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। एक सवाल के जवाब में बुंदेला ने कहा कि मैंने लोगों की परेशानी देखी है। एक राजनेता उन परेशानियों को दूर कर सकता है। उन्होंने कहा कि जब मैंने देखा कि कोई राजनीति नहीं करना चाहता, तो मैंने फैसला किया कि मैं वो करूंगा जो कोई नहीं करना चाहता। मैं देश का विकास करना चाहता हूं। उसके बाद सीएम डॉ. मोहन ने बच्चों से पूछा कि किस-किस के घर में खेती-किसानी होती है और कौन-कौन किसान बनना चाहता है। उन्होंने छात्रों की प्रतिक्रिया देखने के बाद कहा कि हमारी जड़ खेती-किसानी है। बच्चे कहते हैं डॉक्टर बनेंगे, वकील बनेंगे, इंजीनियर बनेंगे, लेकिन कोई नहीं कहता कि मैं किसान बनना चाहता हूं। आप बताइए खेती के बिना काम चलेगा क्या। उन्होंने कहा कि किसान अगर मेहनत करके अन्न नहीं उगाएगा, तो क्या होगा। इसी तरह अगर हम राजनीति करने के लिए खड़े नहीं होंगे, तो अच्छे राजनेता कहां से आएंगे। छात्रा हिमांशी पाठक ने कहा कि मैं शुरूआत एयर होस्टेस बनकर करना चाहती हूं, लेकिन मेरा अंतिम उद्देश्य एंटरप्रिन्योर बनना है। आज कॉम्पटीशन ज्यादा है। इसलिए अपना काम करना ही उचित होगा। इस पर सीएम डॉ. मोहन ने कहा कि इसे सरल भाषा में कहा जाता है कि हम नौकरी पाने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनेंगे। इस बीच पूरा हॉल हिमांशी की उस बात पर ठहाकों से गूंज उठा, जब उसने कहा कि मैंने इस दृश्य को सपने में देखा है। मैंने देखा था कि इसी तरह का हॉल है और मैं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मंच पर हूं।
*बच्चे छोटे, लेकिन सपने और प्रयास बड़े हैं*
छात्रा मान्यता साहू ने कहा कि मैं इस लैपटॉप से बहुत काम करूंगी। ये लैपटॉप मेरी बहुत मदद करेगा। अरिमा इमरान ने कहा कि मैं नीट का एग्जाम दूंगी और मेरा उद्देश्य डॉक्टर बनना है। मैं गरीबों की सेवा करना चाहती हूं। उसके बाद कीर्ति ने माइक हाथ में थामा। उसके हाथ में लगी मेहंदी देखकर सीएम डॉ. मोहन ने कहा कि मैं भी मेहंदी लगा लेता हूं। अपनी बहन को मैं ही मेहंदी लगाता था। कीर्ति ने कहा कि मैं कॉस्ट एंड मैनेजमेंट में करियर बनाना चाहती हूं। इसके बाद तन्वी ने माइक थामा। उसके माइक पकड़ते ही सीएम डॉ. मोहन ने सभी को बताया कि तन्वी 12वीं की पढ़ाई करते-करते मेडिकल कॉलेज भी पहुंच गई है। उसने नीट भी क्लीयर कर लिया। पहली बार में ही दोनों एग्जाम क्लीयर कर लिए। तन्वी ने कहा कि वह डॉक्टर बनना चाहती है। याशी ने 75 फीसदी नहीं लाने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया। उसने बताया कि वह आईएएस बनना चाहती है। उसके बाद ओम चौकसे ने बताया कि मैंने 12वीं के साथ-साथ नीट-जेईई मैन्स-सीयूएलटी भी क्लीयर किया है। इस पर सीएम डॉ. मोहन ने कहा कि आदमी छोटा लेकिन छलांग बड़ी है। ओम ने कहा कि मैं डॉक्टर बनना चाहता हूं। सीएम डॉ. मोहन ने बताया कि ओम के पिता जी बैग बनाकर दुनिया चलाते हैं। उनके पास दुकान भी नहीं है। अभिषेक ने बताया कि वह इसरो का साइंटिस्ट बनना चाहता है।
