सिस्टम की संवेदनहीनता, दिव्यांग पोते के लिए दर-दर भटक रही बेबस दादी

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जितेंद्र वाणी, नानपुर
आलीराजपुर जिले की तीती ग्राम पंचायत में 5 वर्षीय शिवराज मंडलोई सरकारी सिस्टम की  लापरवाही का शिकार है। यह मासूम दृष्टिहीन होने के साथ-साथ हाथ और पैरों से पूरी तरह दिव्यांग है। जन्म के समय ही इसकी मां का निधन हो गया था और पिता दूसरी शादी कर गुजरात चला गया। अब इस बच्चे का लालन-पालन उसकी वृद्ध दादी रंगली कर रही है। वह पोते को चारपाई पर अकेला छोड़कर दो किलोमीटर दूर दूसरों के घरों में बर्तन-कपड़े धोकर रोजी-रोटी का जुगाड़ करती है।

दादी रंगली ने बताया कि वह पोते की मदद के लिए कई बार जिला मुख्यालय के चक्कर लगा चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग, ग्राम पंचायत और आंगनवाड़ी से कोई सहायता नहीं मिली। हद तो यह है कि पति की मौत के बाद रंगली को स्वयं ‘संबल योजना’ का लाभ तक नहीं मिला। जिम्मेदारों की लगातार अनदेखी और घोर गरीबी से हार चुकी दादी अब मजबूर है। बड़ा सवाल यह है कि क्या कोई जिम्मेदार अधिकारी इस गरीब परिवार की आवाज बनेगा?

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