आम्बुआ सहित समीप ग्राम बोरझाड में मनाई गई नागपंचमी

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मयंक विश्वकर्मा, आम्बुआ

सनातन हिन्दू धर्म में देवी देवताओं के अलावा उनके वाहनों एवं अन्य सहयोगी तथा श्रंगारों की भी पूजा का विधान है वह भले ही वर्ष में एक बार ही क्यों न हो ती हो।

             मिली जानकारी के अनुसार हिन्दू देवी देवताओं के साथ उनके वाहनों आदि की पूजा की जाती है , जैसे माता अंबे के वाहन शेर, भगवान कार्तिक के मयूर, श्री गणेश के मूषक, श्री विष्णु जी के गरुण, आदि के साथ भगवान शिव के वाहन नंदी तथा उनके गले के श्रंगार विषधर नाग की पूजा सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को की जाती है।आज भी क्षेत्र में नागपंचमी के पावन अवसर पर हिंदू सनातन धर्म के मानने वाले परिवारों ने घरों के बाहर नाग की आकृतियां बनाई जा कर तथा नाग मंदिरों एवं दीमक बामीं जिसे सर्पों का निवास माना जाता है की विधि विधान के साथ महिलाओं द्वारा की गई,दूध नारियल तथा विभिन्न पूजा सामग्रियों के साथ पूजा अर्चना कर क्षेत्र में तथा घर परिवारों में खुशहाली बनाए रखने हेतु प्रार्थना की गई, सुबह से लेकर दोपहर तक आम्बुआ तथा बोरझाड में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की, मंदिर स्थल पर सुबह से लेकर दोपहर तक पुलिस की माकूल व्यवस्था बनी रही।

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