देवी पुराण का सार हैं जहां नारी को आदर सम्मान दिया जाता हैं वहां स्वयं देवता निवास करते हैं- पंडित योगेश शास्त्री 

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भूपेंद्र चौहान, चंद्रशेखर आजाद नगर

सात दिवसीय संगीतमय देवी भागवत महापुराण कथा के अंतिम दिन नगर के कालिका माता मंदिर परिसर में व्यासपीठ से विद्वान पंडित योगेश शास्त्री ने देवी महापुराण का सार एक श्लोक में बताया कि -“यत्र नार्यस्तु पुज्यन्ते, रमन्ते तंत्र देवता:” अर्थात जहाँ देवी (नारी )का आदर, सम्मान होता हैं। वहीं प्रसन्न रूप में सभी देवता निवास करते हैं।सनातन धर्म के अनुसार घर की स्त्री वह चाहे जिस रूप में भी हो वह स्वयं देवी शक्ति स्वरूपा होती हैं। आगे कथा करते हुवे पंडित शास्त्री ने कहा- वर्तमान परिप्रेक्ष्य में नई पीढ़ी की सोच व बदले व्यवहार में आएं परिवर्तन पर पुरानी पीढ़ी को उनका सही मार्गदर्शन करना चाहिए। उन्हें सप्ताह में अवकाश के दिन परिवार,समाज के नियम बताएं व आध्यात्मिक ज्ञान दे।बेटियों,मातृ शक्ति को मासिक धर्म नियम का अनिवार्यतः पालन करना चाहिए ।जिससे घर में लक्ष्मी आदि बनी रहती हैं। 

देवी पुराण कथा के दौरान बताया सत्य के रूप में देवी के स्वरूप में रक्तबीज,चंड-मुंड व काल का वध कर देवी ने उस पर विजय प्राप्त की।काल हमेशा परिवर्तित हैं। मास परिवर्तन अनुसार काल की स्थिति बताई।शुभ कार्य के लिए काल समय को देखकर किया जाना चाहिए। हमें जिस भी योनी वर्ण में जन्म मिला हैं वहां अच्छे कार्य करने से योनी सुधरती हैं।मनुष्य कुकर्म से मनुष्य से पशु-पक्षी की योनी में चला जाता हैं। माता के रूष्ट रोद्र रूप का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर से हम अपनी बात मनवाते हैं लेकिन ईश्वर की बात नहीं मानते हैं तो फल नहीं प्राप्त होगा। हमें अपने सनातन के अध्यात्म मार्ग पर चलना चाहिये। 

गंगा दशहरे के अवसर पर कहा कि यदि कहीं यात्रा पर गये हैं और पवित्र नदी में स्नान करने मिले तो डुबकी अवश्य लगाए तभी यात्रा का पुण्य मिलता हैं। कथा में प्रसंगवश गंगा मैया के पृथ्वी पर अवतरण की कथा बताई। सगर राजा की चौथी पीढ़ी में राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा महादेव की जटा के माध्यम से पृथ्वी पर अवतरित हुई। जहाँ से भगीरथ उन्हें रास्ता करते हुवे हिमालय से गंगा सागर तक ले गये। पंडित शास्त्री ने गंगा सागर की महिमा बताते हुवे कहा कि सारे तीर्थ बार-बार, गंगा सागर एक बार। गंगा सागर में संक्रांति के दिन स्नान का बड़ा महत्व हैं। देवी भागवत पुराण के अनुसार जीवन में हुवे पाप का शमन व नरक में जाने से बचने के लिए कलियुग में गौमाता की सेवा करना चाहिए।

कथा का समापन आरती प्रसादी पूर्व शिव शक्ति महिला मंडल द्वारा कथा हेतु प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी मातृ शक्ति,यजमान परिवार के साथ नियमित खबरों के प्रसार हेतु समस्त पत्रकारगण,मीडिया के आभार के साथ किया गया। पूर्व विधायक माधौसिंह डावर ने पंडित योगेश शास्त्री व शिव शक्ति महिला मंडल के आग्रह पर गौशाला के लिए भूमि देने की घोषणा की। देवी भागवत पुराण की सातवें व अंतिम दिन की कथा का समापन पूर्व विधायक माधौसिंह डावर द्वारा पंडित योगेश शास्त्री व शिव शक्ति महिला मंडल के आग्रह पर नगर में गौशाला भूमि दान की घोषणा के साथ किया गया। 

इस घोषणा के साथ देवी भागवत कथा में विशेष सहयोग देने वाले पूर्व विधायक डावर का सपत्नीक स्मृति चिन्ह देखकर सम्मान किया गया। देवी भागवत् कथा के लिए के लिए भक्त ने दिए एक लाख ग्यारह हज़ार एक सौ एक दान स्वरूप। देवी भागवत महापुराण की कथा से प्रेरित होकर नगर के भावना मनोहर दास बैरागी के भांजे हीरेंद्र भाई जोशी,अहमदाबाद ने पूरे आयोजन के खर्च के लिए एक लाख एक हजार एक सौ ग्यारह रूपये दान दिए। जिसके लिए भावना मनोहरदास बैरागी को शिवशक्ति महिला मंडल ने स्मृति चिन्ह् देकर सम्मान किया।

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