‘पुजारी हैं अतिथि विद्वान..,’ सीएम मोहन ने किया साथ देने का वादा, कहा- जो हो सकेगा वो करेगी सरकार

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दिनेश वर्मा, झाबुआ

भोपाल। ‘हमने भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले समिति गठित की है। अटकाने-लटकाने-भटकाने का समय गया। अंग्रेज गए और कांग्रेस छोड़ गए। कांग्रेस केवल काम अटकाती थी। आज समय आगे बढ़ने का है। अतिथि विद्वान समिति के माध्यम से जिस भी राज्य का मॉडल लागू करवाना चाहें, उसका प्रस्ताव बनाकर लाएं। सरकार आपके साथ रहेगी। हमारे बीच ये भरोसा कायम रहेगा। हम अतिथि विद्वानों के कल्याण के लिए जो हो सकेगा वो करेंगे।’ यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कही। सीएम डॉ. यादव राजधानी भोपाल के रवींद्र भवन में 10 जुलाई को आयोजित प्रदेश स्तरीय अतिथि विद्वानों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पूरी दुनिया जानती है कि वसुधा को कोई कुटुंबकम समझने वाली संस्कृति हो तो वो भारत की संस्कृति है। यह कदम-कदम पर दिखाई भी देता है। हमारे अतीत का गौरवशाली पृष्ठ बताता है कि भगवान श्री राम का कार्यकाल करीब 15 लाख वर्ष पुराना है। उनके कार्यकाल का एक घटनाक्रम याद करें, जिस समय भगवान श्रीराम भाइयों के साथ दशरथ जी के महल में थे, तब गुरु विश्वामित्र राक्षसों का दमन करने के लिए उनसे उनके पुत्र मांगते हैं। जब विश्वामित्र दशरथ जी से कहते हैं कि हम एक कठिनाई से गुजर रहे हैं, हम जब यज्ञ करते हैं तो उसमें बाधाएं आ जाती हैं। इसलिए हम आपकी मदद चाहते हैं। तब दशरथ जी ने उनसे कहा कि मैं सेना के साथ आपके साथ चलता हूं, लेकिन विश्वामित्र जी ने कहा कि आपको नहीं चलना है, वे उनसे श्रीराम और लक्ष्मण को मांगते हैं। यानी भविष्य गढ़ने और राम राज्य की स्थापना के लिए गुरु की नजर बच्चों पर पड़ी।

*पराक्रम-आत्मविश्वास का आधार होता है गुरु*
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उस वक्त दशरथ जी मान-मनौव्वल करते हैं, लेकिन गुरु विश्वामित्र बच्चों को ले जाते हैं, क्योंकि उन्हें आत्मविश्वास था। इसी तरह शिक्षक का कॉन्फिडेंस भी भविष्य गढ़ता है। इतना ही नहीं गुरु वशिष्ठ उन्हें जनकपुरी ले गए और रावण सहित सबकी उपस्थिति में भगवान राम का पराक्रम दिखाया। इन सबके केंद्र गुरु ही थे। इसी तरह भगवान श्रीकृष्ण ने भी कंस को मारने के बाद उज्जैन के सांदीपनि आकर उन्होंने अपने जीवन का नया रूप देखा। 64 कलाएं, 14 विद्याएं सीखीं और सुदामा के साथ मित्रता कर अमीर-गरीब की दोस्ती का उदाहरण प्रस्तुत किया।

*नवाचार-संवेदना और नैतिक मूल्यों पर टिकी शिक्षा व्यवस्था*
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अतिथि विद्वान महज किसी पद को भरने के खाली स्थान नहीं हैं, ये पावन मंदिर के पुजारी हैं। उनके पढ़ाने से देश का भविष्य उज्ज्वल होगा। इनकी भूमिका छोटी नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार शिक्षा के क्षेत्र में बहुत कुछ कर रही है। देश में अगर सबसे पहले पीएम एक्सीलेंस कॉलेज कहीं खोले गए तो, मध्यप्रदेश में खोले गए। इसी तरह हमने नए विश्वविद्यालय खोलने का निर्णय किया। हमारी सरकार सबसे ज्यादा ध्यान उच्च शिक्षा विभाग और तकनीकी विभाग पर दे रहे हैं। इसमें हमारी तरफ से कोई कमी नहीं है। आज स्कूलों में ड्रॉप आउट जीरो है। उन्होंने कहा कि अब नवाचार-संवेदना और नैतिक मूल्यों के आधार पर शिक्षा व्यवस्था हो रही है। भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि आबादी के अनुपात में मध्यप्रदेश सबसे युवा राज्य है। इसलिए आपकी भूमिका कई गुना ज्यादा बढ़ जाती है।

*एवरेस्ट की तरह डंटे की चोट पर कर रहे काम*
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार ने 13 आकस्मिक, 3 एच्छिक अवकाश दिया है। बहनों को प्रसूति अवकाश दिया गया है। एक वर्ष में निकट स्थान पर जाने की सुविधा भी दी थी। लोकसेवा में भी 25 फीसदी पद आरक्षित करते हुए दस वर्ष की छूट दी थी। 2022 में 117, 2024 में 48 अतिथि विद्वान नियुक्त किए जा चुके हैं। हमारी सरकार के बनते ही हमने तमाम प्रकार की बाधाओं के बीच भी डंके की चोट पर, हिमालय की एवरेस्ट चोटी की तरह लगातार काम कर रहे हैं। हम किसान-युवा-महिला-गरीब सभी के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं। एक तरफ हम इंफ्रास्ट्रक्चर के काम, तो दूसरी तरफ सेवाओं के कामों पर भी ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि रात के 2-2 बजे तक प्रमोशन हो रहे हैं। हर दिन नई लिस्ट निकल रही है। सरकार ने सारी बाधाएं हटा दी हैं। अगर सरकार का काम असरदार नहीं, तो वो सरकार ही नहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम लगातार आगे बढ़ते रहेंगे। आज नक्सलियों को हमने उखाड़ फेंका, अब हम नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री के नेतृत्व में 2029 तक राज्य को नशा मुक्त करने का प्रयास करेंगे।

*सरकार ने अतिथि विद्वानों के हित का रखा ध्यान*
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि राज्य सरकार ने अतिथि विद्वानों के लिए आकस्मिक और ऐच्छिक अवकाश की व्यवस्था लागू की है। महिला अथिति विद्वानों को प्रसूति अवकाश भी दिया जा रहा है। इसके साथ ही लोक सेवा आयोग की सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में अतिथि विद्वानों को 25 प्रतिशत पदों पर आरक्षण दिया है। अथिति विद्वानों को वर्ष में एक बार स्थान परिवर्तन करने और फॉल-आउट होने की स्थिति में प्रत्येक माह दो अवसर देकर दोबारा कार्य करने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 5 कल्याणकारी निर्णय लेकर अथिति विद्वानों के हितों को साधने का प्रयास किया है। राज्य सरकार अतिथि विद्वानों की चिंता करती है। कई वर्षों से शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अतिथि विद्वानों के कल्याण के निर्णय लेने के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई है, जो उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें सौंपेगी। वहीं, भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने कहा कि राज्य सरकार ने अतिथि विद्वानों के हित में सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

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