जब व्यक्ति का समय खराब आता हैं तो भगवान चारों तरफ से परीक्षा लेता है-पंडित योगेश शास्त्री

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आरिफ हुसैन, चंद्रशेखर आजाद नगर

कथा के दौरान राजा हरिचंद्र की कथा सुनाते हुवे बताया का ऋषि विश्वामित्र की दक्षिणा के बदले उन्होंने अपनी पत्नी को दासी रूप में केवल 5000 मुद्रा के लिए तथा बेटे को भी 100 मुद्रा के लिए बेच दिया और मुद्रा कम पडी़ तो स्वयं को बेच दिया।जब व्यक्ति का समय खराब आता हैं चारों तरफ से भगवान परीक्षा लेता हैं। लेकिन राजा हरिशचन्द्र अंततः उसमें सफल हुवे और उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई।

उक्त बात देवी महापुराण कथा के छटवे दिन की कथा सुनाते हुवे कालिका माता मंदिर परिसर में कथा श्रावकों से पंडित योगेश शास्त्री, आलीराजपुर ने व्यासपीठ से कही। आगे की कथा कहते हुवे बताया कि राजा दक्ष ने कठोर साधना की तो उनके यहां स्वयं साक्षात दुर्गा रूपेण पार्वती का जन्म हुआ। शिव और सती एक ही रूप हैं। राजा दक्ष की बेटी पार्वती के विवाह के लिए शिव को पाने के लिए स्वयं बेटी पार्वती व माता ने साधना की जबकि शिव के पास कुछ भी नहीं था। लेकिन शिव की महिमा और अद्भुत स्वरूप को केवल पार्वती जानती थी। इसलिए उन्होंने शिव से विवाह किया। 

प्रसंगवश पंडित शास्त्री ने कहा कि मातृ शक्ति को सुंदर दिखने के लिए ब्यूटीपार्लर में जाने के बजाय भगवान के मंदिर, कथा पांडाल, सत्संग में जाने की बात कही। सुंदर चेहरे से ज्यादा सुंदर मुस्कुराता चेहरा ईश्वर को पसंद हैं। बनावटी चेहरा कुछ देर में कुरूप हो जाएंगा लेकिन प्राकृतिक सुंदरता व सादगी हमेशा बनी रहती हैं।

पंडित शास्त्री ने देवी पुराण के अनुसार कहा व्यक्ति को बिना निमंत्रण के भी अपने माता-पिता,भाई-बहन,देवालय,परममित्र,कथा प्रसंग,संत आदि के यहाँ जाना चाहिए। भले आप उपस्थिति देकर चले आएं। 

पंडित शास्त्री ने बताया कि राजा दक्ष द्वारा अपने राज्य व राजदरबार में शिव व पार्वती के आने पर प्रतिबंध लगा दिया। बावजूद माता पार्वती का शिव के कहने पर पिता के यहाँ जाने व सभी से सम्मान नहीं मिलने पर वह क्रोधित हुई। इसी बीच पार्वती की अपनी माता से आंख मिलने पर जो मिलन का करूण प्रसंग सुनाया तब सभी उपस्थित कथा श्रावकों को भावुक कर दिया। माता पार्वती  के यज्ञ में समाहित होने पर तांडव हो गया। पूरे प्रसंग के अंत में बताया यज्ञ में समा गई माता सती पार्वती को यज्ञ कुंड से निकाल कर शिव के चलते गये ‌जहां-जहां माता सती के अंग गिरे वहां 51 शक्ति पीठों की स्थापना हुई। जहां माता के भक्तों को दर्शन के लिए जाना चाहिए। छटवे दिन की कथा का विराम आरती प्रसादी के साथ यजमान द्वारा किया गया।

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