आरिफ हुसैन, चंद्रशेखर आजाद नगर
कथा के दौरान राजा हरिचंद्र की कथा सुनाते हुवे बताया का ऋषि विश्वामित्र की दक्षिणा के बदले उन्होंने अपनी पत्नी को दासी रूप में केवल 5000 मुद्रा के लिए तथा बेटे को भी 100 मुद्रा के लिए बेच दिया और मुद्रा कम पडी़ तो स्वयं को बेच दिया।जब व्यक्ति का समय खराब आता हैं चारों तरफ से भगवान परीक्षा लेता हैं। लेकिन राजा हरिशचन्द्र अंततः उसमें सफल हुवे और उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई।
उक्त बात देवी महापुराण कथा के छटवे दिन की कथा सुनाते हुवे कालिका माता मंदिर परिसर में कथा श्रावकों से पंडित योगेश शास्त्री, आलीराजपुर ने व्यासपीठ से कही। आगे की कथा कहते हुवे बताया कि राजा दक्ष ने कठोर साधना की तो उनके यहां स्वयं साक्षात दुर्गा रूपेण पार्वती का जन्म हुआ। शिव और सती एक ही रूप हैं। राजा दक्ष की बेटी पार्वती के विवाह के लिए शिव को पाने के लिए स्वयं बेटी पार्वती व माता ने साधना की जबकि शिव के पास कुछ भी नहीं था। लेकिन शिव की महिमा और अद्भुत स्वरूप को केवल पार्वती जानती थी। इसलिए उन्होंने शिव से विवाह किया।
