विद्युत मंडल और ठेकेदार की लापरवाही से अंधेरे में रहने को मजबूर हुए ग्रामीण, रात में फोन नहीं उठाते जेई

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खरडू बड़ी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा था कि 24 घंटे बिजली दी जाएगी, लेकिन धरातल पर इसका पालन होता नजर नहीं आ रहा है। भीषण गर्मी में भी ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं, जिस ओर विद्युत मंडल के अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।

पूरा मामला झाबुआ जिले के रामा ब्लॉक के पारा डीसी अंतर्गत ग्राम खरडू बड़ी का है, जहां बीते दो-चार दिनों से ग्रामीण बिजली गुल होने से भारी परेशान हैं। नौबत यह आ गई है कि खुद गांव वाले आधी-आधी रात को डीपी (DP) पर जाकर अपनी जान जोखिम में डालते हुए लाइट का लूप निकालकर चालू करते हैं, लेकिन इसके बावजूद कुछ ही देर में बिजली फिर गुल हो जाती है। बुधवार की रात भी ग्रामीणों ने अंधेरे में गुजारी।

इस अघोषित बिजली कटौती से आम जनता के साथ-साथ दुकानदारों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। भीषण गर्मी के चलते दुकानदार अपनी दुकानों में कुल्फी, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स और दूध जैसी सामग्रियां रखते हैं। लाइट न होने से यह सामान खराब हो रहा है। ग्रामीणों की शिकायत है कि इन परेशानियों से विद्युत मंडल को कोई फर्क नहीं पड़ता। विद्युत मंडल के जेई (JE) सुनील कुमार मंडलोई रात में फोन नहीं उठाते हैं और गांव में कोई लाइनमैन भी तैनात नहीं है, जो रात-बेरात होने वाले फॉल्ट को ठीक कर सके।

नई केबल डलने के बाद से शुरू हुआ रात में लाइट जाने का सिलसिला

दरअसल, खरडू बड़ी गांव में सालों पुराने तारों को निकालकर नई केबल डाली जा रही है। विद्युत मंडल का कहना था कि इससे बिजली व्यवस्था सुधरेगी और फॉल्ट होने की समस्या नहीं रहेगी। लेकिन ठेकेदार द्वारा जो नई केबल डाली गई है, वह गांव की बिजली का लोड नहीं ले पा रही है और पिघल रही है। पिछले तीन-चार दिनों से ग्रामीण इस समस्या से जूझ रहे हैं।

सवाल यह उठता है कि क्या विद्युत मंडल ने केबल डालने वाली कंपनी को गांव के सही लोड की जानकारी नहीं दी थी? ठेकेदार और विद्युत मंडल को गांव के कुल लोड का आकलन कर उसके हिसाब से सही क्षमता वाली केबल डालनी चाहिए थी, ताकि ग्रामीणों को इस तरह परेशान न होना पड़े।

जान जोखिम में डाल रहे ग्रामीण, हादसे का डर

रमेश डामोर, सिराज, आशीष, तरुण, राजेंद्र, मनोज, राजेश, चिराग, श्यामू और प्रेमसिंग सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि गांव में रात के समय कोई स्थायी लाइनमैन नहीं रहता है। रात में लाइट जाने पर ग्रामीण खुद अपनी जान जोखिम में डालकर डीपी पर जाते हैं और फेस चेक कर लाइट का लूप निकालते हैं। ऐसे में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। अगर कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या विद्युत मंडल इसकी जिम्मेदारी लेगा? ग्रामीणों की मांग है कि गांव में रात के समय भी एक लाइनमैन की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए।

सप्लाई दो भागों में बांटने की मांग

ग्रामीणों ने सुझाव दिया है कि विद्युत मंडल को पूरे बाजार की विद्युत सप्लाई को दो भागों में बांट देना चाहिए, ताकि एक ही लाइन पर ज्यादा लोड न पड़े। केबल पर लोड अधिक होने के कारण वह पिघल रही है, जिससे डीपी पर फेस भी जल रहे हैं। विद्युत मंडल के अधिकारियों को गांव में बढ़ते लोड की समस्या का तत्काल समाधान करना चाहिए।

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