जहां से श्रीमद् भागवत कथा समाप्त होती हैं वहीं से श्रीमद् देवी पुराण शुरू होती हैं- पंडित योगेशजी

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भूपेंद्र चौहान, चंद्रशेखर आजाद नगर

जहां श्रीमद् भागवत पुराण कथा समाप्त होती हैं वहीं से श्रीमद देवी पुराण कथा शुरू होती हैं। दोनों में ही 18 हजार श्लोक हैं। देवी माता या कुलदेवी की प्रसन्नता के लिए देवी भागवत सुनना चाहिए। दोनों भागवत के महात्म्य को समझना चाहिए। देवी पुराण के पहले श्लोक सुनने पर पुरे देवी पुराण का लाभ श्रावक को मिलता हैं। इसलिए देवी श्लोक के मंगलाचरण को अवश्य सुनना चाहिये। कोई भी कार्य का प्रारंभ मंगलाचरण से होता हैं।

उक्त बात अधिक मास में शिव शक्ति महिला मंडल द्वारा कालिका माता मंदिर परिसर में 19 मई से 25 मई 2026 तक रात्रि 7 बजे से आयोजित देवी पुराण के प्रारंभ अवसर पर विद्वान कथाकार पंडित योगेश जोशी, आलीराजपुर ने व्यासपीठ से कहीं। पंडित जोशी ने कहा माता के जो भक्त होते हैं वह सदैव मां के ह्रदय में रहते हैं। माता अपने बच्चों का पूरा ख्याल रखती हैं।माता दिन में एक नहीं अनेक रूप में दिखाई देती हैं। देवी भागवत में बताया कि देवी की आराधना मनुष्य ही नहीं देवता भी करते हैं। स्वयं ब्रह्म,विष्णु व महेश भी देवी भगवती की आराधना भी करते हैं। सनातन धर्म में माताजी की आराधना के लिए चार नवरात्रि आती हैं। देवी भगवती की आराधना से देव भी प्रसन्न होते हैं। देवी आराधना से दोहरा फल प्राप्त होता हैं। देवी भागवत सुनने से सारे पाप क्षण भर में समाप्त हो जाते हैं। इस दौरान कथा में नेमिषारण्यधाम व कुंभ आदि का महत्व भी बताया।

पंडित जोशी ने कथा के दौरान कहा कि मानव जीवन में भौतिक सुख सुविधाओं व बढ़ती धन की ईच्छा के चलते सभी के पास समय की कमी हो चली हैं। 24 घंटे भी कम लगने लगे हैं।लेकिन यह मानव जीवन दोबारा नहीं मिलने वाला हैं जीवन को सार्थक बनाना हैं तो जितना समय भी हो सके धर्म काज आदि में देना चाहिए। कथा में पंडित शास्त्री ने अधिक से अधिक संख्या में धर्म प्रेमी जनता से उपस्थित होने का आग्रह किया।

पहले दिन की कथा के पूर्व श्रीराम मंदिर से कालिका मंदिर तक यजमान परिवार एवं बड़ी संख्या में महिलाओं द्वारा देवी पुराण धारण कर ढोल बाजों के साथ चल समारोह निकाला गया।

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