हरीश राठौड़, पेटलावद
गोकुल में जब तेज बारिश हुई तो भगवान कृष्ण ने गांव वालों को गोवर्धन पर्वत की शरण में जाने को कहा और सभी के साथ मिलकर गोवर्धन पर्वत उठाया कुछ लोग गोवर्धन पर्वत को उठा रहे थे और कुछ लोग भगवान पर विश्वास कर हाथ भी नहीं लगाया। भगवान ने गोवर्धन पर्वत की कथा के माध्यम से शिक्षा दी है कि हे मनुष्य तू व्यर्थ बोझ उठा रहा है तेरे बोझ उठाने से कुछ नहीं होगा। संसार का पूरा भार भगवान ने गोवर्धन पर्वत की भांति उठा रखा है, केवल इंसान को तो अपने कर्म करना है उसका सुफल भगवान स्वयं देंगे। उक्त बात भागवत कथा के 6वें दिन कथावाचक पं.नरेंद्र नंदन दवे ने गोवर्धन पर्वत की कथा का वृंतात सुनाते हुए कहीं।
इस मौके पर श्रद्वालुओं द्वारा गोवर्धन पर्वत की स्थापना भी की गई जो कि बहुत ही आकर्षक लग रही थी जिसे देखकर भक्तगण मोहित हो गए। इस मौके पर भक्तों ने कथा का आनंद लेते हुए भजन व कीर्तन पर नाचते गाते रहे। कथा की पूर्णाहुति आज गुरूवार 24 मई को होगी, जिसमें महाआरती का आयोजन भी रखा गया है। कथा में प्रतिदिन भक्तों का जमावड़ा रहा। कथा आयोजन सीमा परेश धफ्राणी ने कथा की पूर्णाहुति पर अधिक से अधिक भक्तों को धर्मलाभ लेने की अपील की। वहीं 1 कथा के साथ 7 कथा और इसी पांडाल में चल रही है जिनकी भी पूर्णाहुति आज ही होगी.

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