झाबुआ। मध्ययप्रदेश में विधानसभा चुनाव अब निकट आ चुके हैं। पिछले 14 वर्षों से मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार है किंतु इस बार उसे इस बार हार का खतरा मंडरा रहा है। अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए मुख्य मंत्री अब लोगों की सुध लेने में लगे हुए हैं। विगत 15 वर्षों में मध्यप्रदेश का खजाना पूरी तरह खाली हो चुका है तथा मध्यधप्रदेश की सरकार कर्ज में डूबी हुई है। ऐसे में पिछले कुछ वर्षों में किसी विभाग में कोई नियुक्ति नहीं की गई है जिससे लोगों के रिटायरमेंट होने के कारण पद रिक्त होते जा रहे हैं। जिससे प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा सी गई थी। मुख्यमंत्री ने अपने कर्मचारियों को तोफे देकर डेमेज कंट्रोल करने की नाकाम कोशिश की है। उक्त आरोप जिला पंचायत अध्याक्ष कलावती भूरिया सहित जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष हेमचंद्र डामोर, जिला पंचायत उपाध्यक्ष चंद्रवीरसिंह राठौर ने लगाते हुए कहा कि मध्ययप्रदेश की भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण आज पूरी जनता त्रस्त हो चुकी है तथा जनता ने भाजपा को इस चुनाव में उखाड़ फेंकने का मन बना लिया है। पर मुख्यमंत्री पिछले दरवाजे से सत्ता पाने की असफल कोशिश करने लगे है। मध्ययप्रदेश की जनता अब मुख्यमंत्री के बहकावे में आने वाली नहीं है। मुख्यमंत्री ने पिछले चुनाव में जो जनता से वादे किए थे उसे निभाने में वह पूरी तरह नाकाम साबित हुई थी। कोलारस और मुंगावली एवं अन्य उपचुनावों में भाजपा की पराजय ने यह साबित कर दिया है कि इस बार भाजपा के मंसूबे पूरे होने वाले नहीं है। ऐसे में वह कर्मचारियों को तोहफे देकर उसके बदले में अपनी सरकार बचाने की कोशिश करने में लगी है। जिन लोगों को मुख्यमंत्री सुविधा दे रहे है वे यह भी जानते है कि मुख्यमंत्री ने जो हमें सुविधा दी है उसे हमारा भला होने वाला नहीं है न ही प्रदेश की जनता का भला होने वाला है तथा वे मुख्यीमंत्री के इस लॉलीपाप के बहकावे में आने वाले भी नहीं है। कर्मचारी वर्ग अब भाजपा की कथनी और करनी के अंतर को पूरी तरह समझ चुका है ऐसे में भाजपा को आने वाले चुनावों में करारी हार का सामना करना तय है। Post navigation क्षेत्रीय सांसद कांतिलाल भूरिया ने संसद में उठाया सुप्रीम कोर्ट एसटी/एससी एक्ट में किए संशोधन का मुद्दा 88 की फिल्टर प्लाट नल-जल योजना का विधायक ने किया भूमिपूजन