मयंक विश्वकर्मा, आम्बुआ देश में यो तो अनेक समस्याएं तथा परेशानियां हैं इन्हीं में एक परेशानी यह भी है कि जिसने चाहा बंद का आवाहन कर दिया कभी स्वेच्छा से तो कभी दल बल पूर्वक बंद करा दिया जाता है इस बंद से बंद कराने वाले संगठनों राजनीतिक दलों आदि को लाभ होता है या नहीं मगर गरीब जरूर इसमें पिसता रहता है इस महंगाई के जमाने में जब पेट पालना मुश्किल होता है तब बंद के चक्कर ग्रामीणों के धंधे बंद होकर उनके चूल्हे बंद हो जाने का किसी का ध्यान है?जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते हैं चार साढ़े चार साल तक चुप्पी साधे बैठे विभिन्न संगठन तथा विपक्षी राजनीतिक दल ऐसा ऐका एक विभिन्न समस्याओं जो कि विगत वर्षों में रही है इस समय उन्हें उठाकर तत्काल हल कराने की बात लेकर धरना, बंद और ना जाने कैसे-कैसे आंदोलन करने पर आमादा हो जाते हैं अभी हाल ही में एसटी-एससी एक्ट की आड़ लेकर भारत बंद कराया गया इसके पूर्व इसमें बदलाव किए जाने से नाराज लोगों ने भारत बंद करा अब आज 10 सितंबर को डीजल, पेट्रोल, गैस आदि की बढ़ती कीमतों तथा बढ़ती महंगाई को मुद्दा बनाकर कांग्रेस पार्टी ने भारत बंद का आव्हान किया है आज उनको कुछ लोग स्वेच्छा से समर्थन देंगे तो कुछ को मजबूरन बंद कराया जा सकता है आज पुनः गरीब छोटे छोटे व्यवसाई जो रोज धंधा करते हैं तब उनके घरों का चूल्हा जलता है उनका चूल्हा भी बंद रहेगा जिनका जवाबदार कौन होगा?आम्बुआ के युवा कांग्रेसी शाहिद कुरेशी तथा रमेश बघेल ने हमारे प्रतिनिधि को बताया कि पार्टी के निर्देशानुसार आज 10 सितंबर को पूरे भारत के साथ आम्बुआ में भी बंद रखने का आव्हान किया गया है जबरन बंद नहीं कराया जाएगा जिन्हें महंगाई की चिंता है वह स्वयं इसमें सहयोग करेंगे यह सभी वर्ग तथा राजनीतिक दलों के साथ ही जनता के प्रमुख परेशानी है जिसके लिए बंद रखा जा रहा है Post navigation बार-बार मौसम बदलने से बीमारियों ने पांव पसारे, मच्छरों की भरमार- नहीं छिड़की गई दवाई जैन सोशल ग्रुप ने बच्चों के लिए रखी भाषण प्रतियोगिता