ब्रजेश श्रीवास्तव छकतला

जिला मुख्यालय से दूर ग्राम फुलमाल और आसपास की पंचायतों के निवासियों ने क्षेत्र की जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कलेक्टर को प्रार्थना पत्र सौंपा है। ग्रामीणों का कहना है कि हजारों लोगों की उम्मीदों का केंद्र बना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) आज खुद संसाधनों के अभाव में बदहाली के आंसू रो रहा है।

नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टर की भारी कमी

ग्रामीणों ने शिकायत की है कि केंद्र में वर्तमान में केवल एक स्टाफ नर्स कार्यरत है, जिनके लिए 24 घंटे सेवाएं देना असंभव है। इसके साथ ही, केंद्र पर कोई स्थायी डॉक्टर उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर न होने के कारण सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी ग्रामीणों को 20-30 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है, जिससे समय और धन दोनों की हानि हो रही है।

प्रसव सेवाओं का अभाव और जोखिम

स्टाफ की कमी का सबसे बुरा असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। फुलमाल केंद्र पर प्रसव सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण गरीब ग्रामीणों को निजी वाहनों से दूर जाना पड़ता है। ऐसे संवेदनशील मामलों में समय पर उपचार न मिलने से जच्चा-बच्चा दोनों की जान को खतरा बना रहता है।

पेयजल और स्वच्छता का संकट

अस्पताल परिसर में पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। बोरवेल न होने के कारण मरीजों, परिजनों और स्टाफ को पीने के पानी के लिए बाहर भटकना पड़ता है। पानी की कमी से अस्पताल में स्वच्छता बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

सरपंच रावजी बामनिया सहित पंकज सोलंकी, मनीष चौहान और अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:

केंद्र के सुचारू संचालन हेतु कम से कम दो अतिरिक्त नर्सिंग ऑफिसर की नियुक्ति।

नियमित परामर्श हेतु एक स्थायी एम.बी.बी.एस. डॉक्टर की पदस्थापना।

अस्पताल परिसर में प्राथमिकता के आधार पर बोरवेल खनन।

केंद्र पर 24×7 प्रसव सुविधा और प्राथमिक उपचार की दवाइयां सुनिश्चित करना।

ग्रामीणों ने शासन की “हर हाथ को स्वास्थ्य” की मंशा का हवाला देते हुए कलेक्टर से इन मूलभूत समस्याओं पर शीघ्र संज्ञान लेने का अनुरोध किया है।

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