दो अलग-अलग हादसों में युवक और मासूम बालक की मौत

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जितेंद्र वाणी, नानपुर

जिला मुख्यालय के नानपुर थाना अंतर्गत बुधवार शाम दो अलग-अलग दर्दनाक हादसों में एक युवक और एक नौ वर्षीय मासूम बालक की अकाल मृत्यु हो गई। पुलिस ने दोनों मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। दोनों शवों का आज सुबह नानपुर स्वास्थ्य केंद्र में पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। इस घटना के बाद स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

पहली घटना: दो बाइकों की भिड़ंत में युवक की मौके पर ही मौत

मिली जानकारी के अनुसार, कल शाम दो मोटरसाइकिलों के बीच हुई जोरदार टक्कर में एक युवक की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। मृतक की शिनाख्त जितेंद्र (21 वर्ष), पिता छीतू पचाया, जाति भील, निवासी तीती (भील फलिया) के रूप में हुई है। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

दूसरी घटना: तालाब में डूबने से 9 वर्षीय मासूम की गई जान

वहीं, दूसरी हृदय विदारक घटना ग्राम अजंदा की है। यहाँ स्कूल के पास पटेल फलिया का निवासी अंकित (9 वर्ष), पिता ईश्वर आवासिया, तालाब किनारे बकरी चरा रहा था। शाम तक जब बालक घर नहीं पहुंचा, तो चिंतित परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान मासूम अंकित का शव तालाब में तैरता हुआ मिला। परिजनों ने कल शाम को ही इस घटना की सूचना नानपुर पुलिस को दे दी थी।

बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था: रातभर घर में रखना पड़ा मासूम का शव

इस दोहरी त्रासदी ने क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की एक बेहद गंभीर और असंवेदनशील तस्वीर सामने ला दी है। कल शाम को दोनों मौतें होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हुआ कि शवों को रातभर सुरक्षित कहाँ रखा जाए?

ग्रामीणों की परेशानी

नानपुर स्वास्थ्य केंद्र में शवों को सुरक्षित रखने (मर्च्युरी/शव गृह) की कोई व्यवस्था नहीं है। आमतौर पर शाम या रात के समय होने वाली दुर्घटनाओं के शवों को जिला मुख्यालय रेफर कर दिया जाता है। व्यवस्था के अभाव में, तालाब में डूबने से मृत हुए मासूम बालक के शव को परिजनों को रातभर अपने घर पर ही रखने को मजबूर होना पड़ा।

इस अव्यवस्था को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही के कारण पीड़ित परिवारों को दोहरी मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से पुरजोर मांग की है कि नानपुर स्वास्थ्य केंद्र में शवों को सुरक्षित रखने के लिए अविलंब फ्रीजर या मर्च्युरी की व्यवस्था की जाए, ताकि संकट की घड़ी में परिजनों को इस तरह परेशान न होना पड़े।

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