जितेंद्र वाणी, नानपुर पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा ‘क्षीर धारा ग्राम योजना’ के अंतर्गत आयोजित बांझपन निवारण शिविर इन दिनों चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ जहां शिविर में पशुपालकों को पशुपालन के जरिए ग्रामों को विकसित करने की सलाह दी गई, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इसके आयोजन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नानपुर ग्राम पंचायत के सरपंच सकरी ने बताया कि पशु विभाग द्वारा गांव में शिविर लगाने से पहले किसी भी जनप्रतिनिधि को कोई पूर्व सूचना नहीं दी जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग केवल कागजी खानापूर्ति कर रहा है। शादी समारोह जैसे स्थानों या किसी ढाबे से एक टेबल और तीन-चार कुर्सियां मंगाकर फोटो खींच ली जाती है, जिसे जिला प्रशासन के अधिकारियों को भेजकर काम पूरा दिखा दिया जाता है। सरपंच ने आगे कहा कि मौके पर न तो टेंट की व्यवस्था होती है और न ही बैठने के लिए कोई बिछात होती है। ऐसे में यह आशंका है कि शिविरों के नाम पर आने वाली सरकारी राशि निकाली जा रही है और यह पैसा कहां जा रहा है, यह एक बड़ा सवाल है। इन अव्यवस्थाओं और विवादों के बीच, शिविर में उपस्थित किसानों और पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशुओं की जानकारी, उनका उचित रखरखाव, पशु पोषण, उपचार एवं टीकाकरण के बारे में बताया गया। इसके साथ ही गोबर व गोमूत्र के सही निष्पादन को लेकर भी मार्गदर्शन दिया गया। इस अवसर पर डॉ. पूजा सोलंकी, विजय रावत सहित अन्य ग्रामीण मौजूद थे। Post navigation मोटरसाइकिल दुर्घटना में एक की मौत, एक घायल समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की महत्त्वपूर्ण योजनाओं का लाभ पहुंचाना मेरा लक्ष्य : संजय वाणी