रितेश गुप्ता@थांदला

कोरोना महामारी से सारा विश्व जूझ रहा है। संकट की इस घड़ी में घरों से निकलने वाला प्रत्येक कदम युद्ध के मैदान में पहुंचने जैसा है।कोरोना के कारण जिंदगी की जंग लड़ रहे कई मरीजों को स्वयं डॉक्टर अपना जीवन संकट में डाल कर उन्हें मौत के मुंह में जाने से बचा रहे हैं । वर्तमान में अरविंदो अस्पताल इंदौर में 2019 से पदस्थ थान्दला निवासी डॉक्टर सोम्य महावीर जैन सर्जरी विभाग में सीनियर रेसीडेंट के पद पर पदस्थ हैं । 34 वर्षीय युवा चिकित्सक का कहना है कि अरविंदो में 500 से अधिक मरीज संक्रमित है वाकई जिंदगी और मौत से लड़ कर जिंदगी की जंग जीत चुके हैं, पीपीई केटश से लैस युवा चिकित्सक ने बताया कि कोरोना वायरस 13 स्टैंड प्रजाति का है । भारत में कम घातक वाला यह वायरस सक्रिय है, कई बार गंभीर हालत में मरीजों को वेंटिलेटर पर रखना होता है जिससे चिकित्सकों पर भी संक्रमण का खतरा हमेशा बना रहता है और पीड़ित मरीज को कोई दवा कारगर नहीं होती है उसे वेंटिलेटर पर रखकर महंगा इंजेक्शन लगाया जाता है। यदि मरीज को डायबिटीज या अन्य कोई बीमारी होने पर उसे हाइड्रोसीकलोरिन नहीं दे सकते हैं, अन्य चिकित्सक आपस में परामर्श कर रोगी का इलाज करते हैं । सोम्य ने प्रदेश के चिकित्सा मंत्री से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्लाज्मा थेरेपी से मरीजों का इलाज कर उन्हें अवगत भी कराया था।वर्तमान में अस्पताल को ही अपना घर मानने वाले डॉ सौम्य इसके पूर्व चिरायु अस्पताल भोपाल तथा नई दिल्ली के हिंदू राव अस्पताल में अपनी सेवाएं दे चुके हैं । इनके दादा जी डॉ वीरेंद्र कुमार जेन भी थांदला क्षेत्र के जानेमाने चिकित्सक थे । डॉ सोम्य के पिता 64 वर्षीय डॉक्टर महावीर जैन स्वयं डायबिटीज से ग्रस्त होकर हाल ही में उनकी बाईपास सर्जरी हुई है उसके उपरांत भी प्रतिदिन मेघनगर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं ।

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