जितेंद्र वर्मा। जोबट

जोबट अनाज व्यापारी एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार द्वारा मंडी शुल्क 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत किए जाने के निर्णय का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) जोबट के माध्यम से प्रेषित किया गया।

ज्ञापन में व्यापारियों ने कहा है कि वर्तमान समय में देश और दुनिया आर्थिक चुनौतियों एवं युद्ध जैसी परिस्थितियों के प्रभाव से गुजर रहे हैं, जिससे व्यापार-व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। ऐसे समय में मंडी शुल्क में 50 पैसे प्रति सौ रुपये की वृद्धि किसानों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगी। व्यापारियों का कहना है कि डीजल, पेट्रोल, गैस, खाद, दवाइयों सहित आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में पहले से ही वृद्धि हो रही है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है और उनकी उपज के उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं।

व्यापारी संगठन ने ज्ञापन में मंडी शुल्क वृद्धि के निर्णय पर पुनर्विचार कर इसे वापस लेने की मांग की है। साथ ही प्रदेश की मंडियों को पुनः मजबूत और सक्रिय बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। व्यापारियों का आरोप है कि मंडी बोर्ड द्वारा विभिन्न मदों का हवाला देकर शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है, जिससे वैध व्यापार प्रभावित होगा और अवैध व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि मंडियों का संचालन स्थानीय स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है, इसलिए वर्तमान व्यवस्थाओं में सुधार किया जाए तथा किसानों और व्यापारियों के हितों को प्राथमिकता दी जाए।

व्यापारी संघ ने मुख्यमंत्री से प्रतिनिधिमंडल को चर्चा के लिए समय देने की मांग करते हुए मंडियों में व्याप्त समस्याओं और विसंगतियों पर सुझाव प्रस्तुत करने की बात कही है।

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