जितेंद्र वर्मा, जोबट जनजातीय प्रकोष्ठ लोक भवन, भोपाल के विधि विशेषज्ञ बी.एस. रावत द्वारा जिले में उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन का विस्तृत एवं जमीनी स्तर पर निरीक्षण किया गया। इस दौरान उन्होंने केंद्र एवं राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं की प्रगति, लाभार्थियों को मिल रहे लाभ तथा वास्तविक स्थिति का बारीकी से अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान बी.एस. रावत ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के अंतर्गत संचालित इकाइयों का दौरा किया, श्रीमती अनवाई भवर द्वारा संचालित मसाला उद्योग का निरीक्षण करते हुए उत्पादन प्रक्रिया, मशीनरी, गुणवत्ता एवं विपणन की जानकारी ली। इसी क्रम में विनोद गडरिया की आरा मिल तथा आर्यन बघेल की ऑयल मिल का भी निरीक्षण कर इकाइयों के संचालन, रोजगार सृजन एवं आर्थिक सशक्तिकरण पर चर्चा की। बी.एस. रावत ने संबंधित हितग्राहियों से सीधा संवाद कर योजनाओं के लाभ, आ रही समस्याओं एवं विभागीय सहयोग के बारे में फीडबैक लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पहुंचे, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा मिल सके। इसके अतिरिक्त कस्बा जोबट निवासी सहर सिंह के खेत पर पहुंचकर चकती (मल्चिंग) कार्य का निरीक्षण किया गया। यहां आधुनिक तकनीकों के उपयोग, फसल संरक्षण एवं उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की गई। निरीक्षण के दौरान तकनीकी पहलुओं को समझते हुए उन्होंने किसानों को ऐसी नवाचार आधारित पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। निरीक्षण के उपरांत बी.एस. रावत ने उद्यानिकी विभाग के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अधिक से अधिक किसानों एवं युवाओं को योजनाओं से जोड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कार्य किया जाए। रावत के भ्रमण के दौरान सहायक संचालक उद्यान कैलाश चौहान, प्र०व० उ० वि. अधिकारी मुकामसिंह चोंगड़, ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी प्रदीप रावत एवं ररुसिंह वास्केबा उपस्थित रहे उपस्थित रहे। Post navigation कॉलेज रोड चौराहे पर पुलिस की सख्ती, 2 दिन में 83 वाहनों पर कार्रवाई — चार पहिया वाहनों से हटवाए अवैध कैरियर जोबट में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत 55 जोड़ों का सामूहिक विवाह हुआ