बुरहान बंगड़वाला, खरडू बड़ी पति-पत्नी के आपसी प्रेम और समर्पण का महापर्व करवा चौथ है। करवा चौथ के दिन बिना कुछ खाए-पीए निर्जला व्रत रखने का महत्व होता है। सुहागिन महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु, सुखी जीवन, सौभाग्य और समृद्धि की कामना के लिए दिनभर उपवास रखते हुए रात के समय चंद्रमा के दर्शन कर व्रत तोड़ती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर करवा चौथ का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व सुहागिनों के सबसे बड़े त्योहार में से एक है। सुहागिनों के लिए करवा चौथ व्रत का इंतजार सालभर रहता है। जिसमें महिलाएं इस दिन 16 श्रृंगार करके पूरे दिन पानी पीए रहती हैं। शाम को माता करवा की पूजा कर कथा सुनती हैं फिर रात को चांद के निकलने पर अर्ध्य देते हुए पति के हाथों से पानी पीकर व्रत तोड़ती है। Post navigation नल जल योजना की मोटर चोरी एमबीबीएस हिंदी में पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम का वर्चुअल प्रसारण किया गया