झाबुआ लाइव के लिए पेटलावद से हरीश राठौड़ की रिपोर्ट- स्वच्छता मिशन के लिए झाबुआ जिले के पेटलावद में फीडबेक फाउंडेशन नईदिल्ली के राजेश कुमार की टीम की प्रेरणा से सुदूर ग्रामीण महिलाओं, युवतियों में बदलाव की बयार बह रही है तथा इस दिशा में प्रयास कर स्वच्छता मिशन में एक नई इबारत लिखी जा रही है। गुरूवार के दिन मॉर्निंग फालोअप में इस टीम के सदस्य, प्रेरक और निगरानी टीम ने ग्राम पंचायत बोडायता में जनजागृति लाने के लिये अपने प्रयास शुरू किए तो उन्हें विश्वास नही था कि कोई उनकी बात को इतनी गंभीरता से ले लेगा। दरअसल, जब यह पूरी टीम ग्राम नाहरपुरा में मार्निंग फॉलोअप के दौरान पहुंची तो उन्हे एक बालिका रविना हाथ में डिब्बा लिये खुले में शौच करने जा रही थी। उसे निगरानी दल के सदस्यों ने रोका तथा बातचीत करते हुए खुले में शोच को अभिशाप बताया तो बालिका ने उनकी हां में हां मिलाते हुए बताया कि उसके घर शोचालय तो बना है लेकिन वह गंदा है। चूंकि रविना बालिका छात्रावास में रहकर पढाई कर रही है इसिलिये दल की बात उसे समझ में आ गई कि खुले में शोच करने से इज्जत नही रहती है। तथा दुष्परिणाम भी सामने आते है। इज्जत घर के लिए मां से की विनती —————— पूरी टीम के सामने ही रविना ने अपनी माता कबुबाई चौहान से विनती करते हुए शौचालय को उपयोग करने लायक बनाने की मांग की । बेटी की बात और टीम के सदस्यो की बात का मां पर भी असर हुआ और उसने भी शौचालय को उपयोग में लाने के लिये साफ सफाई शुरू कर दी। बालिका रविना ने बताया कि वह कक्षा नवमी में अध्ययनरत है तथा छात्रावास में रहने के दौरान उसे खुले में शोच करने नही जाना पडता है। ऐसे में घर पर रहने के दौरान शोच के लिये बाहर खुले में जाना अच्छा नही लगता था, लेकिन आज निगरानी दल के द्वारा दी गई समझाइश का उस पर गहरा असर हुआ है और वह अपने माता पिता पर विनती के जरिये शौचालय के उपयोग की मंाग कर रही है। टीम में यह रहे शामिल ———– ग्राम पंचायत बोडायता के नाहरपुरा मेें मार्निंग फालोअप के दौरान फीडबैक फाउंनडेश के राजेश कुमार के साथ उपसरपंच अग्निनारायणसिंह, सचिव अंबाराम निनामा, रोजगार सहायक कालूसिंह भूरिया , प्रेरक विष्णु कुंवर, राजु , रामचंद के साथ निगरानी समिति के सदस्य लक्ष्मण चरपोटा,हरिराम चरपोटा,भेरू भाभर, कैलाश चैहान के साथ आंगनवाड़ी की सहायिका और कार्यकर्ता भी साथ थी। Post navigation एक वर्ष बाद पिता की तरह पुत्र की दुर्घटना में हुई मौत, ग्राम में पसरा मातम शांता का सपना हुआ पूरा, पिता के घर पर शौचालय बनवाकर ही आज हुई ससुराल के लिए विदा