मयंक विश्वकर्मा, आम्बुआ आम्बुआ कस्बे में नवनिर्मित अस्पताल भवन निर्माण से लेकर उद्घाटन तथा अब संचालन तक सुर्खियों में रहता आ रहा है निर्माण में जितना घटिया पन किया गया यह यहां आकर अभी देखा जा सकता है। जरा सी मावठे की वर्षा में छत तालाब बन गई तथा दीवारों से पानी का रिसाव हो रहा है। अभी यह हाल है तो वर्षा काल में क्या होगा ? यह विचारणीय प्रश्न खड़ा है इसका जवाब कौन देगा ठेकेदार या स्वास्थ्य प्रशासन? आम्बुआ में विगत वर्ष निर्मित लगभग 1 करोड़ 31 लाख की लागत का स्वास्थ्य भवन बनने से लेकर उद्घाटन तथा उसके बाद आज तक किन्हीं ना किन्हीं कारणों से सुर्खियों में बना हुआ है आज भी यहां अनेक समस्याएं मौजूद है लेकिन भवन निर्माण में घटिया सामग्री की चर्चा जोरों पर रही है भवन के हस्तांतरण के समय नलों की फिटिंग लाइट आदि की खराब स्थिति की चर्चा अभी बंद ही नहीं हुई थी कि क्षेत्र में विगत दिनों से हो रही असमय वर्षा ने घटिया निर्माण की पोल खोलकर रख दी जरा सी बारिश में भवन किसी तालाब या स्विमिंग पूल की तरह दिखाई देने लगी इस भरे हुए पानी का रिसाव दीवारों से होता हुआ नीचे कमरों में आने लगा है संभावना व्यक्त की जा रही है कि वर्षा काल में जब कई कई दिनों तक सतत वर्षा होगी तब क्या स्थिति होगी यदि पानी का रिसाव अधिक हुआ तो अंदर कमरों में जब पानी भर जाएगा तब क्या होगा दवाइयां, बिस्तर, स्टेशनरी, मशीनरी आदि खराब होने से इनकार नहीं किया जा सकता अब इस घटिया निर्माण का दोषी किसे माना जाए ठेका देने वाले, बनाने वाले ठेकेदार या भवन का हस्तांतरण कर अपने आधिपत्य में लेने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी को दोष दिया जाए दंड का भागीदार कौन होगा यह विचारणीय प्रश्न जनमानस में उठ रहा है जिसका जवाब कौन देगा ? Post navigation पार्षद व सामाजिक कार्यकर्ता ने बलवारी हनुमान के दर्शन कर चोला चढ़ाया सहकारी समितियों के कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम दिया ज्ञापन