भूपेंद्र नायक, पिटोल
जिले में आबकारी विभाग की निष्क्रियता अब सड़कों पर खूनी संघर्ष का सबब बनने लगी है। जो काम नियमतः प्रशासन और पुलिस को करना चाहिए, वह काम अब शराब ठेकेदारों के लठैत (गुर्गे) कर रहे हैं। बीती रात पिटोल के समीप मोद नदी के पुल पर हुआ हादसा इसका जीवंत प्रमाण है, जहाँ अवैध शराब के परिवहन को रोकने के लिए सरकारी मशीनरी नहीं, बल्कि ठेकेदारों की बिना नंबर वाली गाड़ियाँ एक-दूसरे से टकरा रही हैं। यह भिड़ंत इतनी भीषण थी कि दोनों वाहनों के एयरबैग तक खुल गए, जिससे नेशनल हाईवे पर बड़ी जनहानि भी हो सकती थी।

सरकारी दर किनारे, ठेकेदारों की ‘लूट’ से पनपा अवैध कारोबार
झाबुआ जैसे आदिवासी बहुल जिले में शराब के ठेके करोड़ों की ऊंची बोली पर लिए जाते हैं। सूत्रों के अनुसार, इन ठेकों की वसूली के लिए ठेकेदार प्रिंट रेट (MRP) से कहीं ज्यादा कीमतों पर शराब बेच रहे हैं। इसी ‘ओवररेट’ के कारण जिले में दूसरे जिलों से सस्ती और अवैध शराब की आवक बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में कम दाम पर शराब खपाने के चक्कर में बाहर के ठेकेदार झाबुआ की सीमा में सेंधमारी कर रहे हैं, जिससे स्थानीय ठेकेदारों के गुर्गों और बाहरी सप्लायर्स के बीच सड़कों पर ‘गैंगवार’ जैसे हालात पैदा हो रहे हैं।

बिना नंबर की गाड़ियों का तांडव और पुलिस की भूमिका पर सवाल
घटनाक्रम के अनुसार, इंदौर पासिंग की एक क्रेटा कार (MP 09 CT 7455) में अवैध शराब ले जाई जा रही थी, जिसे स्थानीय ठेकेदार की बिना नंबर वाली बोलेरो ने टक्कर मारी। हैरानी की बात यह है कि पुलिस के पहुँचने पर बिना नंबर वाली क्षतिग्रस्त बोलेरो मौके पर थी, परंतु कुछ देर बाद गुर्गे बॉलरों के फरार होंगे। क्या पुलिस केवल शराब पकड़ने तक सीमित है या वह सड़कों पर अवैध रूप से दौड़ रहे ठेकेदारों के इन ‘निजी लड़ाकों’ पर भी लगाम कसेगी?
