लोकसभा चुनाव के चलते सियासत के लिऐ महत्वपूर्ण हुआ पश्चिम मध्यप्रदेश का भगोरिया उफ॔ भोंगरिया उत्सव

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चंद्रभानसिंह भदोरिया @ चीफ एडिटर

माना जा रहा है कि देश मे आगामी लोकसभा चुनाव के चलते चुनावी तारीखों का एलान मार्च के पहले या दूसरे हफ्ते में हो जाएगी ओर तीसरा हफ्ता लगते ही पश्चिम मध्यप्रदेश के धार, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन एवं रतलाम रुरल मे आदिवासियों का परंपरागत पर्व भगोरिया उर्फ भोंगरिया उत्सव शुरू हो जायेगा जो होली तक चलेगा, 14 मार्च से 20 मार्च के बीच पश्चिम मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों में 100 से अधिक भगोरिया उर्फ भोंगरिया मेले लगेंगे और सियासी साल यानी लोकसभा चुनाव का एलान हो जाने के चलते भगोरिया उर्फ भोंगरिया मेले राजनीति ओर जनसंपर्क का बड़ा माध्यम बनकर उभरेंगे। बीजेपी ओर कांग्रेस अक्सर भगोरिया उर्फ भोंगरिया उत्सव मे ढोल मांदल के साथ गैर निकालती आई है जिसमे सांसद और विधायक शिरकत करते रहे है आदिवासियों के इस लोक उत्सव को लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भुनाने के लिए बीजेपी ने अपनी कार्ययोजना बनाना शुरु कर दी है बीजेपी भगोरिया मेलों मे अमित शाह से लेकर शिवराज को उतारने की रणनीति पर काम कर रही है जबकि कांग्रेस अपने क्षैत्रीय क्षत्रपों के सहारे ही इस लोक उत्सव में उतरेगी लेकिन इतना तय है कि अगर राहुल गांधी या प्रियंका गांधी जैसी शख्सियत पश्चिम मध्यप्रदेश के भगोरिया उर्फ भोंगरिया उत्सव मे शामिल होती है तो सियासत का मिजाज बदल सकता है इस बार आदिवासी युवाओं का संगठन जयस इस लोक उत्सव मे काफी सक्रिय होने का अनुमान है क्योकि अगर कांग्रेस ने लोकसभा में अगर जयस को महत्व नही दिया या उसकी ताकत की अनदेखी की तो पश्चिम मध्यप्रदेश सहित मध्यप्रदेश की आदिवासी राजनीति बदलना तय है।

ऐसे समझे आदिवासियों के राजनीतिक महत्व को-
मध्यप्रदेश की राजनीति और प्रशासन में आदिवासियों का अपना महत्व है लेकिन अभी तक आंकड़ों के अनुसार राजनीति और प्रशाशन में आदिवासियों को उतना महत्व नही मिला, जिसके वह हकदार है। मध्यप्रदेश में कुल 21 फीसदी आदिवासी आदिवासियों की है यानी की हर पांचवा शख्स आदिवासी है। ण्मध्यप्रदेश मे विधानसभा की कुल 230 सीटों में से 47 सीटे आदिवासियों के लिए आरक्षित है जबकि लोकसभा की 6 सीटे आदिवासियों के लिए आरक्षित है, प्रशासन में आलम यह है कि पांचवी अनुसूची लागू नहीं हो पाई है ज्।ब् कागजों पर सक्रिय है ओर मुख्यमंत्री उसके अध्यक्ष है जबकि आदिवासी समाज को अध्यक्ष पद देकर कमलनाथ सरकार आदिवासियों को सकारात्मक संदेश दे सकती है बहरहाल भगोरिया उर्फ भोंगरिया उत्सव में आदिवासियों को कांग्रेस-बीजेपी और जयस में से कौन अपनी और खींचने मे कामयाब होगा यह देखने वाली बात होगी।
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