राणापुर में पर्यूषण महापर्व की धूम: संवत्सरी पर की क्षमायाचना, तीन तपस्वियों की तपस्या जारी

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कुंवर हर्षवर्धन सिंह परिहार, राणापुर

नगर में पर्यूषण महापर्व के अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों और भक्ति का माहौल बना हुआ है। महापर्व के सातवें दिन नगर के तीनों जैन मंदिरों में नित्य धार्मिक आयोजनों के साथ विशेष धर्मसभाएं आयोजित की गईं।
श्री मुनिसुव्रत स्वामी जिनालय एवं राजेन्द्र भवन में साध्वी श्री चैत्य प्रिया श्रीजी एवं शास्त्र वाचक दर्शित छजलानी के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने जिनवाणी का श्रवण किया। दोपहर में पार्श्व संगीत मंडल द्वारा श्री राजेंद्र सूरीश्वर जी की अष्ट प्रकारी पूजन कराई गई। इस पूजन के लाभार्थी चंद्रसेन कटारिया, अभय कटारिया, मोतीलाल सालेचा, रमेशचंद्र सालेचा एवं सज्जनलाल बसंतीलाल कटारिया परिवार रहे।
संवत्सरी प्रतिक्रमण और पौषध व्रत
महापर्व के आठवें दिन श्री मुनिसुव्रत स्वामी जिनालय में 40 श्रावक-श्राविकाओं ने पौषध व्रत अंगीकार किया। शास्त्र वाचक दर्शित छजलानी ने श्रद्धालुओं को प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव जी के जीवन चरित्र का भावपूर्ण वर्णन सुनाया। शाम को महापर्व के मुख्य अवसर पर संवत्सरी प्रतिक्रमण का आयोजन हुआ। इसमें समाजजनों ने वर्षभर में जाने-अनजाने में 84 लाख जीव योनि के प्रति हुई भूलों, अविनय या किसी का दिल दुखाने के लिए हाथ जोड़कर ‘मिच्छामि दुक्कड़म’ कहते हुए क्षमायाचना की।
तपस्या का दौर जारी
श्वेताम्बर जैन समाज में तपस्या का क्रम भी उत्साहपूर्वक जारी है। पुण्य सम्राट श्री जयंतसेन सूरीश्वर जी के आशीर्वाद, आचार्य श्री नित्यसेन सूरी जी, आचार्य श्री जयरत्न सूरी जी की कृपा एवं साध्वी श्री चैत्य प्रिया श्रीजी आदि ठाना की निश्रा में नगर के तीन तपस्वी कठिन तप साधना कर रहे हैं:
* ध्रुवी मनीष सकलेचा: 8 उपवास
* कांची जयेश कटारिया: 9 उपवास
* सम्यक विपुल सेठ: 10 उपवास
तपस्वियों की इस उग्र तपस्या से पूरे समाज में हर्ष और धर्म का माहौल व्याप्त है।

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