बदहाली के आंसू रोता नानपुर श्मशानघाट, मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे ग्रामीण

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जितेंद्र वाणी, ​नानपुर

डबल इंजन सरकार के दावों के बीच ग्राम नानपुर का श्मशानघाट प्रशासनिक उदासीनता और दो ग्राम पंचायतों के आपसी मतभेद के कारण अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। करीब 10 हजार की आबादी (जिसमें 90% हिंदू समाज है) वाले इस क्षेत्र में अंतिम संस्कार जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भी परिजनों को अग्निपरीक्षा देनी पड़ रही है।

​श्मशानघाट में आज तक चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) का निर्माण नहीं हो सका है, जिससे न केवल सुरक्षा का खतरा है बल्कि परिसर में पौधारोपण भी असंभव हो गया है। अंतिम संस्कार के समय परिजनों को भीषण धूप झेलनी पड़ती है, क्योंकि शोकसभा के लिए बना एकमात्र टीन शेड पूरी तरह जर्जर हो चुका है। बारिश के दिनों में स्थिति और अधिक कष्टदायक हो जाती है।

​ग्रामीणों और वरिष्ठ नागरिकों की मांग है कि श्मशानघाट का शीघ्र जीर्णोद्धार कर वहां सुव्यवस्थित टीन शेड और बाउंड्री वॉल बनाई जाए। साथ ही, शवदाह गृह के समीप नाले पर एक छोटे घाट का निर्माण कराया जाए ताकि अंतिम क्रियाएं सुगम हो सकें। ग्रामवासियों ने जिले की माननीय सांसद, कैबिनेट मंत्री और जनप्रतिनिधियों से इस संवेदनशील विषय पर तत्काल संज्ञान लेने की अपील की है।

सरपंच ने कहा जल्द बजट का प्रावधान करेंगे

मामले में ग्राम पंचायत नानपुर की सरपंच सकरी समरथ सिंह मौर्य से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा ग्रामीणों व आम जनता की परेशानी को देखते हुए हम जल्द बजट का प्रावधान कर नानपुर मुक्ति धाम की वाल बाउंड्री का निर्माण करेंगे। इसके पूर्व भी हमने एक पतरे का शेड लगाया है।

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