विजय मालवी, बड़ी खट्टाली
जलझूलनी एकादशी यानी डोल ग्यारस का पर्व मंगलवार को बड़ी खट्टाली में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। श्री चारभुजा धाम में भगवान श्री चारभुजा नाथ के दर्शन एवं डोला पूजन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। दिनभर मंदिर में धार्मिक आयोजन हुए। मंदिर में मंगला आरती, श्रृंगार आरती, ध्वजारोहण, फलाहारी राजभोग और उत्थापन आरती सहित धार्मिक कार्यक्रम हुए। शाम को भगवान श्री चारभुजा नाथ को डोले में विराजमान कर नगर भ्रमण के लिए ले जाया गया।

चल समारोह में बग्घी, अश्व, डीजे और बैंड शामिल रहे। भजनों की धुन पर श्रद्धालु नाचते-गाते हुए चल समारोह में शामिल हुए। नगर के प्रमुख मार्गों से निकल रहे डोले के दर्शन के लिए जगह-जगह लोगों की भीड़ रही। इस दौरान “हाथी-घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” और “कौन हमारे साथ है, चारभुजा के नाथ हैं” जैसे जयघोष लगाए गए।
नदी में पानी की कमी के बीच कुंड बनाकर हुआ जलाभिषेक – चल समारोह हथनी नदी तट स्थित मैदान पर पहुंचा। इस वर्ष कम वर्षा के कारण हथनी नदी में पर्याप्त पानी नहीं था। ऐसे में जहां भगवान श्री चारभुजा नाथ का जलाभिषेक एवं पूजन किया जाना था। वहीं नदी के बीच एक कुंड बनाकर उसमें जल भरा गया। इसी कुंड में भगवान श्री चारभुजा नाथ का विधि-विधान से जलाभिषेक किया जिसके पश्चात डोला आरती की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। इस दौरान आतिशबाजी भी की गई। इसके बाद भगवान का डोला वापस मंदिर परिसर पहुंचा, जहां महाआरती हुई। रात्रि में भजन संध्या का आयोजन भी किया गया।
