आलीराजपुर में शिक्षाकर्मियों की बैठक में अनुभवी शिक्षकों पर TET थोपने के खिलाफ निर्णायक आंदोलन की चेतावनी दी

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आलीराजपुर। दाहोद रोड स्थित समाधि स्थल पर जिले के शिक्षाकर्मियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। वर्ष 1998 से कार्यरत लगभग 300 शिक्षकों ने अपनी प्रथम नियुक्ति तिथि से नियमित वेतनमान, 12 एवं 24 वर्ष की क्रमोन्नति और सेवा निरंतरता के लाभ को लेकर चर्चा की। शिक्षकों का कहना है कि राज्य शासन द्वारा 1 जुलाई 2018 को स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन किए जाने के बाद, उन्हें 1998 से ही शासकीय कर्मचारी मानकर 1 जनवरी 2006 से छठा वेतनमान तथा 1 जनवरी 2016 से सातवां वेतनमान 12 प्रतिशत ब्याज सहित तीन माह के भीतर एरियर सहित दिया जाए।

बैठक को संबोधित करते हुए रतलाम से आए परसराम कापड़िया ने कहा कि यदि मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग ने 28 वर्ष से अधिक अनुभव रखने वाले वरिष्ठ शिक्षकों पर टीईटी (TET) परीक्षा की अनिवार्यता का अव्यवहारिक फैसला जबरन लागू किया, तो इसके खिलाफ आर-पार का निर्णायक आंदोलन किया जाएगा। शिक्षकों ने मांग उठाई कि यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर टीईटी परीक्षा अनिवार्य कर रही है, तो मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की तीनों खंडपीठों इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर द्वारा शिक्षाकर्मियों के पक्ष में दिए गए निर्णयों को भी पूरी तरह लागू करे।

इस अवसर पर रतलाम के संजय उपाध्याय, कार्यक्रम संयोजक अशोक राठौड़, राज्य शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अनुज द्विवेदी, बी.एस. कनेश, वेंकटेश मूर्ति, वीरेंद्र सिंह जाधव, राजेंद्र बैरागी, रतनसिंह रावत, मगनसिंह मौर्य, गुमान सिंह गाडरिया, प्रवीण कोली, सरदार सिंह भईड़िया, रायसिंह अवासिया, धुंधरसिंह चौंघड़, रविंद्र बैरागी, मदन डावर, श्रीमती विजया चौंगोड़ और श्रीमती केशर अजनार सहित जिले के सभी विकासखंडों से बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का सफल संचालन फिरोज सागर ने किया तथा अंत में आभार प्रदर्शन रतनसिंह रावत द्वारा किया गया।

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