तत्वज्ञ श्री धर्मेंद्रमुनिजी म. सा. के सानिध्य में करुणामूर्ति सलाहकार पूज्य श्री रुपेंद्रमुनिजी म. सा. की 28 वीं पुण्यतिथि जप-तप से मनाई 

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थांदला। आचार्य प्रवर पूज्य गुरुदेव श्री उमेशमुनिजी म .सा.के गुरु भ्राता श्रमण संघीय सलाहकार करुणामूर्ति पंडित रत्न पूज्य श्री रुपेंद्रमुनिजी म .सा.की 28 वीं पुण्यतिथि प्रसंग पर बुधवार को विभिन्न आराधनाएं हुई। उक्त पुण्यतिथि आध्यात्म योगी आचार्य श्री उमेशमुनिजी म. सा. के सुशिष्य धर्मदास गणनायक प्रवर्तकश्री जिनेंद्रमुनिजी म. सा. के आज्ञानुवर्ती तत्वज्ञ श्री धर्मेंद्रमुनिजी, संदीपमुनिजी, जंयतमुनिजी, प्रशस्तमुनिजी, सुयशमुनिजी, प्रसन्नमुनिजी, श्रेयांशमुनिजी, गौरवमुनिजी ठाणा 8 एवं साध्वी निखिलशीलाजी, दिव्यशीलाजी, प्रियशीलाजी, दीप्तिजी ठाणा 4 सहित 12 संयमी आत्माओं के सानिध्य में जप-तप-त्याग-तपस्या एवं विविध धर्माराधनाओं के साथ उत्साहपूर्वक मनाई गई।

गुणानुवाद सभा का हुआ आयोजन

श्री संघ के अध्यक्ष प्रदीप गादिया व सचिव हितेश शाहजी ने बताया कि इस अवसर पर स्थानीय पौषध भवन आयोजित गुणानुवाद सभा में तत्वज्ञ श्री धर्मेन्द्रमुनिजी ने कहा कि पूज्य श्री रुपेंद्रमुनिजी म .सा.के जीवन में ईषया भाव व लोकेषणा जरा भी नहीं थी । वे बहुत संतोषी थे । मान कषाय जरा भी नहीं था । वे संस्कृत , प्राकृत आदि भाषाओं के अलावा थोकडे़ के भी विशेष जानकार थे । विशिष्ट ज्ञान के अभ्यासी थे । वेदना होने के बावजुद उन्होंने लगातर विहार किया । छोटे-छोटे संघों ने भी उनकी स्थिरवास की विनंती की। बड़े होने के बावजूद उन्होंने हमेशा छोटों को आगे बढ़ाया उनमें बहुत सारे गुण थे सबका वर्णन करना संभव भी नहीं । विशिष्ट आराधना करके अपने संयमी में जीवन को सफल और सार्थक किया ।रोचक वक्ता संदीपमुनिजी ने कहा कि पूज्य श्री रुपेंद्रमुनिजी म. सा. हमेशा समता भाव से रहते थे। वे हमेशा पीछे रहते थे और बड़ों को आगे करते थे । वे लोगों के हृदय में बसे हुए थे महत्वकांक्षा जरा भी नहीं थी । सभा में रतलाम व मेघनगर श्री संघ के अलावा बदनावर व मंडलेश्वर के श्रावक श्राविकाएं भी उपस्थित थे। सभा में श्री धर्मदास जैन श्री संघ रतलाम के महामंत्री राजीव चौरड़िया ने संत व साध्वी मंडल से संवत्सरी संबंधी क्षमायाचना की व वर्षावास के पश्चात रतलाम पधारने की पुरजोर विनंती की । मेघनगर श्री संघ के उपाध्यक्ष विनोद बाफना ने मेघनगर संघ की ओर से संत व साध्वी मंडल से संवत्सरी संबंधी क्षमायाचना की । मेघनगर बहू मंडल ने सामूहिक स्तवन प्रस्तुत किया। संचालन श्री संघ के अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने किया ।

। पुण्यतिथि के प्रसंग पर 125 श्रावक-श्राविकाओं ने सामूहिक एकासन तप की तपस्या की ।सामूहिक एकासन तप का आयोजन श्री संघ द्वारा स्थानीय महावीर भवन पर किया गया था । पुण्यतिथि प्रसंग पर श्रावक-श्राविकाओ ने तीन-तीन सामायिक की आराधना भी की ।

तपस्याओं का दौर जारी

श्री संघ के सहसचिव कपिल पीचा व नवयुवक मंडल के अध्यक्ष प्रांजल लोढ़ा ने बताया कि यहां बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं तप आराधना कर रहे हैं। बुधवार को धर्मसभा में श्री संघ के उपाध्यक्ष अशोक तलेरा व निलेश बरमेचा ने 28 – 28 उपवास , डॉक्टर गोल्डी प्रदीप शाहजी , कुमारी भवी जितेंद्र चौरडिया , अल्केश लोढा़ , अनमोल लोढा़ , प्रवीण श्रीमाल , रूपल श्रीमाल व श्वेता संदीप शाहजी ने 16 – 16 उपवास के प्रत्याख्यान व प्रिया प्रफुल्ल तलेरा ने 7 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए । वही कई आराधकों ने विविध तप के प्रत्याख्यान ग्रहण किए । रत्नपुरी गौरव युवा संत श्री गिरीशमुनिजी म . सा .की सांसारिक भुआ माला सुरेशचंद्र जैन रतलाम ने 18 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए । श्री संघ की ओर से श्री धर्मलता जैन महिला मंडल की अध्यक्ष किरण श्री श्रीमाल ने तपस्वी का शाल ओढ़ाकर माला पहनाकर बहुमान किया । इस अवसर पर श्री गिरीशमुनिजी के सांसारिक पिता ललित व माताजी प्रमिला गांधी सहित कई संयमी आत्माओं के स्वजन भी उपस्थित थे।

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