आदिवासी बाहुल्य झाबुआ में समाज की अपनी धर्मशाला नहीं: महंगे निजी स्थानों के किराए से बचने के लिए कलेक्टर से की निर्माण की मांग

0

झाबुआ। आदिवासी बाहुल्य झाबुआ जिले में आदिवासी समाज ने अपने सामाजिक, सांस्कृतिक और मांगलिक कार्यक्रमों के लिए सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला निर्माण की पुरजोर मांग उठाई है। इस संबंध में समाज के लोगों ने कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। इसमें मांग की गई है कि जिला मुख्यालय सहित जिले के सभी 6 विकासखंडों में शासन की निधि से धर्मशालाओं या सामुदायिक भवनों का निर्माण कराया जाए।

कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया है कि जिले में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज निवास करता है। वर्षों से समाज द्वारा विवाह समारोह, सामाजिक बैठकें और अन्य पारिवारिक आयोजन किए जाते रहे हैं। दुर्भाग्यवश, जिले में आदिवासी समाज के लिए कोई पर्याप्त एवं व्यवस्थित धर्मशाला उपलब्ध नहीं है। इस कमी के कारण गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को मजबूरी में महंगे निजी गार्डन या अन्य स्थान किराए पर लेने पड़ते हैं, जिससे उन पर भारी अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ता है।

समाज के लोगों ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराते हुए कहा कि जिले में अन्य समाजों के लिए विभिन्न स्थानों पर अपनी धर्मशालाएं और सामुदायिक भवन मौजूद हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि आदिवासी बाहुल्य जिले में मूल निवासियों को ही इस सुविधा से वंचित क्यों रखा गया है? शासन द्वारा हर साल आदिवासी कल्याण और विकास के लिए करोड़ों-अरबों रुपये का बजट आवंटित किया जाता है। समाज की मांग है कि इसी शासकीय बजट और निधियों का उपयोग कर इन धर्मशालाओं का निर्माण कराया जाए।

कलेक्टर के समक्ष रखी गईं प्रमुख मांगें:

  • मुख्यालय पर निर्माण: झाबुआ जिला मुख्यालय पर आदिवासी समाज के लिए एक सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला का निर्माण तुरंत कराया जाए।

  • सभी ब्लॉक में हो व्यवस्था: जिले के सभी 6 विकासखंडों में उपयुक्त शासकीय भूमि चिन्हित कर आदिवासी धर्मशाला/सामुदायिक भवन बनाए जाएं।

  • शासकीय मद से मिले स्वीकृति: आदिवासी विकास एवं कल्याण से संबंधित शासकीय निधि तथा अन्य उपलब्ध मदों से इसके लिए राशि स्वीकृत की जाए।

  • शासन को भेजा जाए प्रस्ताव: जिला प्रशासन इस जनहित की मांग पर त्वरित कार्रवाई करते हुए राज्य शासन को आवश्यक प्रस्ताव बनाकर भेजे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.