भूपेंद्र नायक पिटोल
जिस प्रकार शरीर को पोषण के लिए भोजन की आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार पर्यावरण को शुद्ध रखने के लिए पेड़-पौधों की आवश्यकता होती है। पेड़-पौधे पर्यावरण की अशुद्धियों को सोख लेते हैं और हमें शुद्ध प्राणदायिनी वायु प्रदान करते हैं। इस संतुलन को बनाए रखने के लिए हमें अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने चाहिए।
पिटोल से 4 किलोमीटर दूर स्थित गांव भीमफलिया के डॉ. जगदीश खतेड़िया वर्ष 2012 से पिटोल एवं आसपास के गांवों में अब तक 2000 से अधिक पौधे लगा चुके हैं। इनमें से अधिकतर पौधे अब बड़े होकर वृक्ष का रूप ले चुके हैं। डॉ. खतेड़िया अपने डॉक्टरी पेशा से समय निकालकर जहाँ भी वृक्षारोपण का कार्यक्रम होता है या पौधों की आवश्यकता होती है, वहाँ पौधे उपलब्ध कराते हैं। किसी भी बंजर भूमि को हरा-भरा करने के लिए वे तन, मन और धन से जुट जाते हैं। वे समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर पर्यावरण संरक्षण का यह पुनीत कार्य करते हैं।
